swar sandhi ke bhed

Swar Sandhi ke Kitne Bhed Hote Hain? स्वर संधि के 5 भेद और 50+ उदाहरण

स्वर संधि के पाँच भेद होते हैं — दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि और अयादि संधि। जब दो स्वर आपस में मिलते हैं और उनके मेल से जो परिवर्तन (विकार) होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। इस लेख में पाँचों भेदों की परिभाषा, नियम, 50+ उदाहरण और पहचानने की आसान ट्रिक दी गई है — जो स्कूल की परीक्षा से लेकर SSC, UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तक काम आएगी।

स्वर संधि की परिभाषा | Swar Sandhi ki Paribhasha

जब दो स्वरों के मेल से कोई विकार या परिवर्तन उत्पन्न होता है, तो उसे स्वर संधि कहते हैं। इसे अच् संधि भी कहा जाता है। जैसे — विद्या + आलय = विद्यालय। यहाँ ‘आ’ और ‘आ’ मिलकर ‘आ’ बन गए।

ध्यान रहे, संधि के कुल तीन भेद होते हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। यह लेख स्वर संधि के भेदों पर है — विसर्ग संधि के कितने भेद होते हैं, यह अलग लेख में समझाया गया है।

स्वर संधि के 5 भेद | Swar Sandhi ke Bhed

भेदनियम (संक्षेप में)उदाहरण
1. दीर्घ संधिसमान स्वर + समान स्वर = दीर्घ स्वरविद्या + अर्थी = विद्यार्थी
2. गुण संधिअ/आ + इ/ई = ए, अ/आ + उ/ऊ = ओ, अ/आ + ऋ = अर्सूर्य + उदय = सूर्योदय
3. वृद्धि संधिअ/आ + ए/ऐ = ऐ, अ/आ + ओ/औ = औसदा + एव = सदैव
4. यण संधिइ/ई = य्, उ/ऊ = व्, ऋ = र् (भिन्न स्वर से पहले)अति + अधिक = अत्यधिक
5. अयादि संधिए = अय्, ऐ = आय्, ओ = अव्, औ = आव्ने + अन = नयन

अब हर भेद को उदाहरणों के साथ विस्तार से समझते हैं।

1. दीर्घ संधि | Deergh Sandhi

नियम: जब दो समान (सजातीय) स्वर — ह्रस्व हों या दीर्घ — आपस में मिलते हैं, तो दोनों मिलकर दीर्घ स्वर बन जाते हैं। यानी अ/आ + अ/आ = आ, इ/ई + इ/ई = ई, उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दमेल
विद्या + अर्थीविद्यार्थीआ + अ = आ
हिम + आलयहिमालयअ + आ = आ
सूर्य + अस्तसूर्यास्तअ + अ = आ
गिरि + ईशगिरीशइ + ई = ई
कवि + इंद्रकवींद्रइ + इ = ई
भानु + उदयभानूदयउ + उ = ऊ
वधू + उत्सववधूत्सवऊ + उ = ऊ

2. गुण संधि | Gun Sandhi

नियम: जब अ या आ के बाद इ/ई आए तो दोनों मिलकर बनते हैं; उ/ऊ आए तो ; और ऋ आए तो अर् बनता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दमेल
देव + इंद्रदेवेंद्रअ + इ = ए
महा + ईशमहेशआ + ई = ए
सूर्य + उदयसूर्योदयअ + उ = ओ
महा + उत्सवमहोत्सवआ + उ = ओ
जल + ऊर्मिजलोर्मिअ + ऊ = ओ
राजा + ऋषिराजर्षिआ + ऋ = अर्
महा + ऋषिमहर्षिआ + ऋ = अर्

3. वृद्धि संधि | Vriddhi Sandhi

नियम: जब अ या आ के बाद ए/ऐ आए तो दोनों मिलकर बनते हैं; और ओ/औ आए तो बनता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दमेल
एक + एकएकैकअ + ए = ऐ
सदा + एवसदैवआ + ए = ऐ
मत + ऐक्यमतैक्यअ + ऐ = ऐ
वन + ओषधिवनौषधिअ + ओ = औ
महा + औषधिमहौषधिआ + औ = औ
परम + औदार्यपरमौदार्यअ + औ = औ

4. यण संधि | Yan Sandhi

नियम: जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भिन्न (असमान) स्वर आता है, तो इ/ई का य्, उ/ऊ का व् और ऋ का र् हो जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दमेल
अति + अधिकअत्यधिकइ + अ = य्
इति + आदिइत्यादिइ + आ = य्
प्रति + एकप्रत्येकइ + ए = य्
सु + आगतस्वागतउ + आ = व्
अनु + एषणअन्वेषणउ + ए = व्
मातृ + आनंदमात्रानंदऋ + आ = र्
पितृ + उपदेशपित्रुपदेशऋ + उ = र्

5. अयादि संधि | Ayadi Sandhi

नियम: जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भिन्न स्वर आता है, तो ए का अय्, ऐ का आय्, ओ का अव् और औ का आव् हो जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दमेल
ने + अननयनए = अय्
चे + अनचयनए = अय्
गै + अकगायकऐ = आय्
नै + अकनायकऐ = आय्
पो + अनपवनओ = अव्
पौ + अकपावकऔ = आव्
नौ + इकनाविकऔ = आव्

पहचानने की ट्रिक: शब्द देखकर संधि कैसे पहचानें?

परीक्षा में सबसे आसान तरीका है — संधि से बने शब्द में जो स्वर या वर्ण दिख रहा है, उसी से भेद पहचानो:

शब्द में क्या दिखेकौन सी संधियाद रखने का उदाहरण
आ, ई, ऊ (दीर्घ स्वर)दीर्घ संधिविद्यर्थी
ए, ओ, अर्गुण संधिसूर्यदय
ऐ, औवृद्धि संधिसद
य्, व्, र् (आधा अक्षर)यण संधिस्ागत
अय, आय, अव, आवअयादि संधियन, गायक

बस एक सावधानी: ए/ओ गुण में भी दिखते हैं और अयादि के मूल (ने, पो) में भी — इसलिए हमेशा संधि विच्छेद करके जाँच लें।

स्वर संधि के और उदाहरण | Swar Sandhi ke Udaharan

ऊपर हर भेद के साथ उदाहरण दिए गए हैं। अभ्यास के लिए यहाँ 22 और उदाहरण दिए जा रहे हैं — भेद के नाम के साथ, ताकि आप खुद जाँच सकें:

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्दभेद
धर्म + अर्थधर्मार्थदीर्घ संधि
परम + अर्थपरमार्थदीर्घ संधि
देव + आलयदेवालयदीर्घ संधि
स्व + अर्थस्वार्थदीर्घ संधि
रवि + इंद्ररवींद्रदीर्घ संधि
मुनि + ईशमुनीशदीर्घ संधि
गुरु + उपदेशगुरूपदेशदीर्घ संधि
नर + इंद्रनरेंद्रगुण संधि
गज + इंद्रगजेंद्रगुण संधि
रमा + ईशरमेशगुण संधि
पर + उपकारपरोपकारगुण संधि
देव + ऋषिदेवर्षिगुण संधि
सप्त + ऋषिसप्तर्षिगुण संधि
तत्र + एवतत्रैववृद्धि संधि
हित + एषीहितैषीवृद्धि संधि
यदि + अपियद्यपियण संधि
अभि + आगतअभ्यागतयण संधि
प्रति + उत्तरप्रत्युत्तरयण संधि
अभि + उदयअभ्युदययण संधि
सु + अच्छस्वच्छयण संधि
शे + अनशयनअयादि संधि
भो + अनभवनअयादि संधि

स्वर संधि के कुछ विशेष रूप

हिंदी में संस्कृत से आए कुछ विशेष रूप भी मिलते हैं — पूर्वरूप संधि (जहाँ पहला स्वर ही बना रहता है), पररूप संधि (जहाँ बाद वाला स्वर बना रहता है) और प्रकृतिभाव (जहाँ कोई परिवर्तन नहीं होता)। सामान्य परीक्षाओं में मुख्यतः ऊपर बताए पाँच भेद ही पूछे जाते हैं।

व्याकरण की तैयारी और मज़बूत करें

संधि के साथ-साथ इन विषयों को भी दोहरा लें — परीक्षा में ये अक्सर साथ पूछे जाते हैं:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

स्वर संधि के कितने भेद होते हैं?

स्वर संधि के पाँच भेद होते हैं — दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि और अयादि संधि।

स्वर संधि का दूसरा नाम क्या है?

स्वर संधि को अच् संधि भी कहते हैं, क्योंकि संस्कृत व्याकरण में स्वरों को ‘अच्’ कहा जाता है।

संधि के कुल कितने भेद होते हैं?

संधि के तीन भेद होते हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि के आगे पाँच उपभेद होते हैं।

‘स्वागत’ में कौन सी संधि है?

स्वागत में यण संधि है। इसका संधि विच्छेद है — सु + आगत, जहाँ ‘उ’ का ‘व्’ हो गया है।

‘महर्षि’ में कौन सी संधि है?

महर्षि में गुण संधि है। इसका संधि विच्छेद है — महा + ऋषि, जहाँ आ + ऋ मिलकर ‘अर्’ बने हैं।

दीर्घ संधि की पहचान कैसे करें?

अगर संधि विच्छेद करने पर दोनों ओर समान स्वर (अ-अ, इ-इ, उ-उ परिवार के) मिलें और शब्द में दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ) दिखे, तो वह दीर्घ संधि है। जैसे — हिम + आलय = हिमालय।

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