विसर्ग संधि के कितने भेद होते हैं? (4 भेद, नियम और उदाहरण)

विसर्ग संधि के 4 प्रमुख भेद माने जाते हैं — सत्व संधि, उत्व संधि, रुत्व (रत्व) संधि और विसर्ग लोप संधि। जब किसी शब्द के अंत में आए विसर्ग (ः) का मेल किसी स्वर या व्यंजन से होता है, और इससे विसर्ग में कोई विकार (परिवर्तन) होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं। इस लेख में चारों भेदों की परिभाषा, नियम और उदाहरण दिए गए हैं।

विसर्ग संधि की परिभाषा

विसर्ग (ः) के बाद जब कोई स्वर या व्यंजन आता है, और इस मेल से विसर्ग में परिवर्तन होता है, तो उसे विसर्ग संधि कहते हैं। जैसे — मनः + रथ = मनोरथ (यहाँ विसर्ग बदलकर ओ हो गया)। संधि तीन प्रकार की होती है — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। यह लेख विसर्ग संधि के भेदों पर केंद्रित है।

ध्यान दें: कुछ आसान/स्कूली किताबें इसे सरल तरीके से सिर्फ़ “3 प्रकार” बताकर पढ़ाती हैं, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं और मानक व्याकरण ग्रंथों में 4 भेदों वाला वर्गीकरण सबसे ज़्यादा स्वीकृत है — यही याद रखना सुरक्षित है।

विसर्ग संधि के 4 भेद

भेदनियम (संक्षेप में)उदाहरण
1. सत्व संधिविसर्ग के बाद त्, थ्, च्, छ्, श्, ष्, स् आए → विसर्ग स्/श् में बदल जाता हैनिः + संदेह = निस्संदेह
2. उत्व संधिविसर्ग से पहले अ, बाद में अ या घोष व्यंजन (य्/र्/ल्/व्/ह् आदि) आए → विसर्ग ओ में बदल जाता हैमनः + हर = मनोहर
3. रुत्व (रत्व) संधिविसर्ग से पहले अ/आ के अलावा कोई स्वर, बाद में स्वर/घोष व्यंजन → विसर्ग र् में बदल जाता हैनिः + धन = निर्धन
4. विसर्ग लोप संधिविसर्ग से पहले आ, बाद में स्वर/घोष व्यंजन आए → विसर्ग का लोप हो जाता हैरामाः + इति = रामा इति

अब हर भेद को उदाहरणों के साथ विस्तार से समझते हैं।

1. सत्व संधि

नियम: यदि विसर्ग (ः) के बाद त्, थ् या स् आए, तो विसर्ग बदलकर स् हो जाता है। यदि बाद में च्/छ् या श् आए, तो विसर्ग श् में बदल जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
निः + संदेहनिस्संदेह
दुः + तरदुस्तर
रामः + चरामश्च
निः + छलनिश्छल

क्, ख्, ट्, ठ्, प्, फ् के साथ विशेष नियम

यह हिस्सा अक्सर गड़बड़ाया जाता है, इसलिए ध्यान से पढ़ें:

  • सामान्यतः विसर्ग के बाद क्, ख्, प् या फ् आने पर विसर्ग अपरिवर्तित ही रहता है — जैसे प्रातः + काल = प्रातःकाल, अंतः + करण = अंतःकरण, दुः + ख = दुःख
  • लेकिन यदि विसर्ग से पहले इ या उ हो, और बाद में क्, ख्, ट्, ठ्, प् या फ् आए, तो विसर्ग ष् में बदल जाता है — जैसे निः + कलंक = निष्कलंक, चतुः + पाद = चतुष्पाद, धनुः + टंकार = धनुष्टंकार
  • कुछ गिने-चुने शब्द अपवाद हैं जिन्हें सीधे याद रखना पड़ता है — सबसे मशहूर उदाहरण है नमः + कार = नमस्कार, जहाँ सामान्य नियम के उलट विसर्ग स् में बदल जाता है।

2. उत्व संधि

नियम: यदि विसर्ग से पहले अ हो, और बाद में भी अ या कोई घोष व्यंजन (वर्ग का तीसरा-चौथा-पाँचवाँ वर्ण, या य्/र्/ल्/व्/ह्) आए, तो विसर्ग बदलकर हो जाता है। जब बाद में अ हो, तो वह अ आगे चलकर अवग्रह (ऽ) में बदल जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
मनः + हरमनोहर
मनः + रथमनोरथ
तपः + बलतपोबल
रामः + अवदत्रामोऽवदत्
सूर्यः + अपिसूर्योऽपि

3. रुत्व (रत्व) संधि

नियम: यदि विसर्ग से पहले अ/आ के अलावा कोई अन्य स्वर (इ, ई, उ, ऊ आदि) हो, और बाद में कोई स्वर या घोष व्यंजन आए, तो विसर्ग बदलकर र् (रेफ) हो जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
निः + धननिर्धन
निः + आशानिराशा
निः + आहारनिराहार
निः + अंतरनिरंतर

विशेष स्थिति: यदि र् के बाद दोबारा र् आ जाए, तो पहला र् लुप्त हो जाता है और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है — जैसे निः + रव = नीरव, निः + रोग = नीरोग।

4. विसर्ग लोप संधि

नियम: यदि विसर्ग से पहले आ हो, और बाद में कोई स्वर या घोष व्यंजन आए, तो विसर्ग का पूरी तरह लोप (गायब) हो जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
रामाः + इतिरामा इति
देवाः + आगतदेवा आगत

व्याकरण की तैयारी और मज़बूत करें:
👉 स्वर संधि के कितने भेद होते हैं?
👉 व्यंजन संधि के कितने भेद होते हैं?
👉 वर्ण किसे कहते हैं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

विसर्ग संधि के कितने भेद होते हैं?

विसर्ग संधि के 4 प्रमुख भेद माने जाते हैं — सत्व संधि, उत्व संधि, रुत्व संधि और विसर्ग लोप संधि। कुछ सरल किताबें इसे 3 प्रकार में भी बताती हैं, लेकिन 4 भेदों वाला वर्गीकरण सबसे मानक है।

‘नमस्कार’ में कौन सी संधि है?

नमस्कार में सत्व संधि है। इसका संधि विच्छेद है — नमः + कार, जहाँ विसर्ग बदलकर स् हो गया है। यह एक स्मरणीय अपवाद है क्योंकि सामान्यतः विसर्ग के बाद क् आने पर विसर्ग अपरिवर्तित रहता है (जैसे प्रातःकाल में)।

‘प्रातःकाल’ में विसर्ग अपरिवर्तित क्यों रहता है?

क्योंकि विसर्ग के बाद क्, ख्, प् या फ् आने पर सामान्य नियम यही है कि विसर्ग में कोई बदलाव नहीं होता। प्रातः + काल = प्रातःकाल इसी नियम का उदाहरण है। नमस्कार जैसे कुछ शब्द इसके अपवाद हैं।

‘मनोहर’ में कौन सी संधि है?

मनोहर में उत्व संधि है। इसका संधि विच्छेद है — मनः + हर, जहाँ विसर्ग बदलकर ओ हो गया है।

‘निर्धन’ में कौन सी संधि है?

निर्धन में रुत्व (रत्व) संधि है। इसका संधि विच्छेद है — निः + धन, जहाँ विसर्ग बदलकर र् हो गया है।

Priya Sree is a passionate writer at DesiDose.in, where she explores a wide range of topics, from culture and lifestyle to health and wellness. With a knack for weaving words that resonate, Priya brings a unique and engaging perspective to every article she writes.