व्यंजन संधि के कितने भेद होते हैं? (7 भेद, नियम और उदाहरण)

व्यंजन संधि के 7 प्रमुख भेद (प्रकार) माने जाते हैं — जश्त्व, अनुस्वार, ष्टुत्व, श्चुत्व, लत्व, छत्व और अनुनासिक संधि। व्यंजन संधि को हल् संधि भी कहते हैं। जब किसी व्यंजन का मेल किसी दूसरे व्यंजन या स्वर से होता है और इससे जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। इस लेख में सातों भेदों की परिभाषा, नियम और उदाहरण दिए गए हैं — साथ ही यह भी बताया गया है कि अलग-अलग किताबों में यह संख्या अलग-अलग क्यों बताई जाती है।

व्यंजन संधि की परिभाषा

जब एक व्यंजन का मेल दूसरे व्यंजन या स्वर से होता है, और इस मेल से कोई ध्वनि-परिवर्तन (विकार) होता है, तो उसे व्यंजन संधि कहते हैं। जैसे — दिक् + अम्बर = दिगम्बर (यहाँ क् बदलकर ग् हो गया)। संधि तीन प्रकार की होती है — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। यह लेख व्यंजन संधि के भेदों पर केंद्रित है।

“कितने भेद” पर अलग-अलग जवाब क्यों मिलते हैं?

स्वर संधि के भेद गिनना आसान है — हमेशा 5 (दीर्घ, गुण, वृद्धि, यण, अयादि)। लेकिन व्यंजन संधि अलग है: यह ध्वनि-परिवर्तन के ढेर सारे नियमों पर आधारित है, इसलिए अलग-अलग किताबें और शिक्षक इसे अलग-अलग तरीकों से गिनते हैं — कोई 6 प्रकार बताता है, कोई 9, कोई सिर्फ़ नियमों की सूची (11 या उससे ज़्यादा) दे देता है। परीक्षा और सामान्य अध्ययन के लिए सबसे ज़्यादा स्वीकृत और मानक वर्गीकरण 7 प्रमुख प्रकार वाला है, जो नीचे दिया गया है — यही याद रखना सबसे सुरक्षित है।

व्यंजन संधि के 7 भेद

भेदनियम (संक्षेप में)उदाहरण
1. जश्त्व संधिक्, च्, ट्, त्, प् (वर्ग का पहला वर्ण) + स्वर/य्/र्/ल्/व्/ह् या वर्ग का तीसरा-चौथा वर्ण → अपने वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता हैदिक् + अम्बर = दिगम्बर
2. अनुस्वार संधिम् + क् से म् तक कोई व्यंजन → म् अनुस्वार (ं) में बदल जाता हैसम् + तोष = संतोष
3. ष्टुत्व संधिस्/त-वर्ग + श् या च-वर्ग → स्/त-वर्ग, ष्/ट-वर्ग में बदल जाता हैतत् + टीका = तट्टीका
4. श्चुत्व संधिस्/त-वर्ग + श् या च-वर्ग → स्/त-वर्ग, श्/च-वर्ग में बदल जाता हैमनस् + चलति = मनश्चलति
5. लत्व संधित्/द् के बाद ल् आने पर त्/द् भी ल् में बदल जाता हैउत् + लास = उल्लास
6. छत्व संधिस्वर के बाद छ् आने पर छ् से पहले च् जुड़ जाता हैस्व + छंद = स्वच्छंद
7. अनुनासिक संधित-वर्ग या द-वर्ग का व्यंजन + न्/म् → अनुनासिक (उसी वर्ग का पाँचवाँ वर्ण) में बदल जाता हैउत् + नयन = उन्नयन

अब हर भेद को विस्तार से समझते हैं।

1. जश्त्व संधि

नियम: यदि क्, च्, ट्, त्, प् (हर वर्ग का पहला वर्ण) के बाद कोई स्वर, य्, र्, ल्, व्, ह् या किसी वर्ग का तीसरा-चौथा वर्ण आए, तो क्, च्, ट्, त्, प् अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण — क्रमशः ग्, ज्, ड्, द्, ब् — में बदल जाते हैं।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
दिक् + अम्बरदिगम्बर
दिक् + गजदिग्गज
वाक् + ईशवागीश
अच् + अंतअजंत
षट् + आननषडानन

2. अनुस्वार संधि

नियम: यदि म् के बाद क् से लेकर म् तक (यानी क-वर्ग से लेकर प-वर्ग तक) कोई भी व्यंजन आए, तो म् बदलकर अनुस्वार (ं) बन जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
सम् + तोषसंतोष
सम् + कल्पसंकल्प
सम् + बंधसंबंध
किम् + चित्किंचित्

3. ष्टुत्व संधि

नियम: यदि स् या त-वर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के साथ ष् या ट-वर्ग (ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्) का मेल हो, तो स्/त-वर्ग बदलकर ष्/ट-वर्ग में बदल जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
तत् + टीकातट्टीका
राम् + षष्ठीरामष्षष्ठी

4. श्चुत्व संधि

नियम: यदि स् या त-वर्ग (त्, थ्, द्, ध्, न्) के पहले या बाद में श् या च-वर्ग (च्, छ्, ज्, झ्, ञ्) आए, तो स्/त-वर्ग बदलकर श्/च-वर्ग में बदल जाता है। इसका सूत्र है — “स्तोः श्चुना श्चुः”।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
मनस् + चलतिमनश्चलति
कस् + चित्कश्चित्
निस् + चयनिश्चय
सत् + चित्सच्चित्

5. लत्व संधि

नियम: यदि त् या द् के बाद ल् आए, तो त्/द् भी बदलकर ल् बन जाता है (यानी ल् का द्वित्व हो जाता है)।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
उत् + लासउल्लास
तत् + लीनतल्लीन
उत् + लेखउल्लेख

6. छत्व संधि

नियम: यदि किसी स्वर के बाद छ् वर्ण आए, तो छ् से पहले च् वर्ण अपने आप जुड़ जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
स्व + छंदस्वच्छंद
वि + छेदविच्छेद
तरु + छायातरुच्छाया
अनु + छेदअनुच्छेद

7. अनुनासिक संधि

नियम: यदि त-वर्ग या द-वर्ग (क्, च्, ट्, त्, प् समूह) के किसी वर्ण के बाद न् या म् आए, तो वह व्यंजन बदलकर अपने ही वर्ग के पाँचवें (अनुनासिक) वर्ण में बदल जाता है।

संधि विच्छेदसंधि युक्त शब्द
उत् + नयनउन्नयन
जगत् + नाथजगन्नाथ
चित् + मयचिन्मय

परीक्षा के लिए ज़रूरी अतिरिक्त नियम

ऊपर के 7 भेदों के अलावा कुछ और नियम भी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं:

  • णत्व नियम: ऋ, र् या ष् के बाद (बीच में स्वर या कुछ व्यंजन आने पर भी) न् का ण् हो जाता है। जैसे — प्र + नाम = प्रणाम, राम + अयन = रामायण।
  • र् के बाद र् का लोप: यदि र् के बाद र् आए, तो पहला र् लुप्त हो जाता है और उससे पहले का स्वर दीर्घ हो जाता है। जैसे — निर् + रस = नीरस, निर् + रोग = नीरोग।

व्याकरण की तैयारी और मज़बूत करें:
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👉 वर्ण किसे कहते हैं
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

व्यंजन संधि के कितने भेद होते हैं?

व्यंजन संधि के 7 प्रमुख भेद माने जाते हैं — जश्त्व, अनुस्वार, ष्टुत्व, श्चुत्व, लत्व, छत्व और अनुनासिक संधि। कुछ किताबें इसे अलग-अलग संख्या में गिनती हैं क्योंकि यह मुख्यतः नियमों पर आधारित है, लेकिन 7 वाला वर्गीकरण सबसे मानक है।

व्यंजन संधि को और किस नाम से जाना जाता है?

व्यंजन संधि को हल् संधि भी कहते हैं, क्योंकि संस्कृत व्याकरण में व्यंजनों को ‘हल्’ कहा जाता है।

संधि के कुल कितने भेद होते हैं?

संधि के तीन भेद होते हैं — स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। व्यंजन संधि के आगे 7 उपभेद होते हैं।

‘संतोष’ में कौन सी संधि है?

संतोष में अनुस्वार संधि है। इसका संधि विच्छेद है — सम् + तोष, जहाँ म् बदलकर अनुस्वार (ं) बन गया है।

‘उल्लास’ में कौन सी संधि है?

उल्लास में लत्व संधि है। इसका संधि विच्छेद है — उत् + लास, जहाँ त् बदलकर ल् हो गया है।

Pooja Singh writes for desidose.in, moving easily between lifestyle, sport, travel and whatever is trending that day. She turns the week’s noise into clear, lively stories you actually want to read.