Karmadharaya Samas Ke Udaharan — परिभाषा, प्रकार और 30+ उदाहरण

कर्मधारय समास वह समास है जिसमें पहला पद (पूर्वपद) विशेषण होता है और दूसरा पद (उत्तरपद) विशेष्य — या फिर पहला पद उपमान और दूसरा पद उपमेय होता है। इसमें उत्तरपद प्रधान होता है। उदाहरण — नीलकमल = नीला कमल (यहाँ “नीला” विशेषण है, “कमल” विशेष्य)। इस लेख में परिभाषा, 2 प्रकार, पहचानने की ट्रिक, 40+ उदाहरण, अभ्यास प्रश्न, और सबसे ज़रूरी — बहुव्रीहि समास से इसका असली फ़र्क समझाया गया है।

कर्मधारय समास की परिभाषा

जिस समास में पहला पद विशेषण हो और दूसरा पद विशेष्य हो, अथवा पहला पद उपमान (जिससे तुलना की जाए) और दूसरा पद उपमेय (जिसकी तुलना की जाए) हो, और समास-विग्रह करने पर “है जो”, “के समान” या “रूपी” जैसे शब्द जुड़ें, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। इसमें उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है।

कर्मधारय समास के 2 प्रकार

प्रकारपहचानउदाहरण
1. विशेषण-विशेष्य कर्मधारयपहला पद गुण/विशेषता बताए, दूसरा पद वस्तु/व्यक्तिनीलकमल = नीला कमल
2. उपमान-उपमेय कर्मधारयपहला पद तुलना का आधार (उपमान), दूसरा पद जिसकी तुलना हो (उपमेय)चंद्रमुखी = चंद्र के समान मुख

पहचानने की ट्रिक: कर्मधारय समास कैसे पहचानें?

परीक्षा में शब्द देखकर तुरंत पहचानने के लिए 3 सवाल पूछें:

  1. क्या विग्रह करने पर “है जो”, “के समान” या “रूपी” शब्द जुड़ता है? (नीलकमल → नीला है जो कमल) — अगर हाँ, आगे बढ़ें।
  2. क्या समास खुद अपने बारे में बात कर रहा है, किसी तीसरे व्यक्ति/वस्तु के बारे में नहीं? अगर समास किसी और की ओर इशारा कर रहा है (जैसे नीलकंठ = शिव), तो वह कर्मधारय नहीं, बहुव्रीहि है।
  3. क्या उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान लग रहा है? कर्मधारय में हमेशा दूसरा पद मुख्य होता है, पहला पद सिर्फ़ उसकी विशेषता बताता है।

अगर तीनों जवाब “हाँ” हों, तो वह निश्चित रूप से कर्मधारय समास है।

कर्मधारय समास के 40 उदाहरण

समस्त पदविग्रह
नीलकमलनीला कमल
महात्मामहान है जो आत्मा
नीलगगननीला है जो गगन
सद्धर्मसत् है जो धर्म
सज्जनसत् है जो जन
पुरुषरत्नरत्न रूपी पुरुष
आदिप्रवर्तकपहला प्रवर्तक
कीर्तिलताकीर्ति रूपी लता
भक्तिसुधाभक्ति रूपी सुधा
नीलपत्रनीला पत्र
चंद्रमुखीचंद्र के समान मुख वाली
कमलनयनकमल के समान नयन
देहलतादेह रूपी लता
भवसागरभव रूपी सागर
क्रोधाग्निक्रोध रूपी अग्नि
विद्याधनविद्या रूपी धन
महाराजमहान है जो राजा
महादेवमहान है जो देव
महावीरमहान है जो वीर
महापुरुषमहान है जो पुरुष
नीलोत्पलनीला है जो उत्पल (कमल)
प्राणप्रियप्राणों के समान प्रिय
लौहपुरुषलोहे के समान (दृढ़) पुरुष
वज्रदेहवज्र के समान देह
मुखचंद्रचंद्र के समान मुख
परमात्मापरम है जो आत्मा
रक्तकमललाल कमल
श्वेतपत्रसफ़ेद पत्र
नवयुवकनया युवक
प्रधानमंत्रीप्रधान है जो मंत्री
अधमराआधा है जो मरा
दुरात्माबुरी है जो आत्मा
स्वर्णकमलसोने का (सुनहरा) कमल
जीवनज्योतिजीवन रूपी ज्योति
राजर्षिराजा जो ऋषि के समान है
मुखारविंदमुख रूपी अरविंद (कमल)
करकमलकमल के समान कर (हाथ)
चरणकमलकमल के समान चरण
घनघोरघन के समान घोर
प्रियसखाप्रिय है जो सखा
रक्तचंदनलाल चंदन

कर्मधारय समास बनाम बहुव्रीहि समास — असली फ़र्क

यह सबसे बड़ा confusion है, और ज़्यादातर लेख इसे साफ़ नहीं करते। नीलकंठ, पीतांबर, घनश्याम जैसे शब्द देखने में कर्मधारय जैसे लगते हैं (नीला + कंठ), लेकिन असल में ये बहुव्रीहि समास हैं। फ़र्क समझने का आसान तरीका:

  • कर्मधारय में समास स्वयं अपने बारे में बताता है — जैसे “नीलकमल” का मतलब है वह कमल जो नीला है। यहाँ बात कमल की ही हो रही है।
  • बहुव्रीहि में समास किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर इशारा करता है — जैसे “नीलकंठ” का मतलब है “जिसका कंठ नीला है” यानी शिव। यहाँ बात कंठ की नहीं, बल्कि शिव (एक तीसरी इकाई) की हो रही है।
शब्दविग्रहअसली समासक्यों
नीलकंठजिसका कंठ नीला है (शिव)बहुव्रीहितीसरी इकाई (शिव) की ओर इशारा
पीतांबरजिसका वस्त्र पीला है (विष्णु)बहुव्रीहितीसरी इकाई (विष्णु) की ओर इशारा
नीलकमलनीला कमलकर्मधारयकमल के बारे में ही बात हो रही है

परीक्षा टिप: जब भी संदेह हो, पूछें — “क्या यह शब्द अपने बारे में बात कर रहा है, या किसी और (तीसरे व्यक्ति/वस्तु) के बारे में?” अपने बारे में = कर्मधारय। किसी और के बारे में = बहुव्रीहि।

अभ्यास के लिए 5 प्रश्न (Practice MCQs)

  1. “महादेव” में कौन सा समास है?
    उत्तर: कर्मधारय समास (महान है जो देव)।
  2. “चरणकमल” का सही विग्रह क्या है?
    उत्तर: कमल के समान चरण (उपमान-उपमेय कर्मधारय)।
  3. “पीतांबर” कर्मधारय है या बहुव्रीहि?
    उत्तर: बहुव्रीहि — क्योंकि यह किसी तीसरे व्यक्ति (विष्णु) की ओर इशारा करता है, स्वयं वस्त्र के बारे में नहीं।
  4. कर्मधारय समास में कौन सा पद प्रधान होता है?
    उत्तर: उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है।
  5. “लौहपुरुष” किस प्रकार का कर्मधारय समास है?
    उत्तर: उपमान-उपमेय कर्मधारय (पुरुष की तुलना लोहे से की गई है)।

व्याकरण की तैयारी और मज़बूत करें:
👉 तत्पुरुष समास के 10 उदाहरण
👉 स्वर संधि के कितने भेद होते हैं?
👉 व्यंजन संधि के कितने भेद होते हैं?
👉 समूहवाचक संज्ञा के उदाहरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

कर्मधारय समास किसे कहते हैं?

जिस समास में पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य हो, या पहला पद उपमान और दूसरा पद उपमेय हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं। जैसे — नीलकमल (नीला कमल)।

कर्मधारय समास के कितने प्रकार होते हैं?

कर्मधारय समास के 2 मुख्य प्रकार होते हैं — विशेषण-विशेष्य कर्मधारय (जैसे नीलकमल) और उपमान-उपमेय कर्मधारय (जैसे चंद्रमुखी)।

‘नीलकंठ’ में कौन सा समास है — कर्मधारय या बहुव्रीहि?

नीलकंठ में बहुव्रीहि समास है, कर्मधारय नहीं। इसका विग्रह है ‘जिसका कंठ नीला है’ यानी शिव — यह किसी तीसरी इकाई (शिव) की ओर इशारा करता है, इसलिए यह बहुव्रीहि है।

कर्मधारय समास में प्रधान पद कौन सा होता है?

कर्मधारय समास में उत्तरपद (दूसरा पद) प्रधान होता है। जैसे नीलकमल में ‘कमल’ प्रधान है, ‘नीला’ उसकी विशेषता बता रहा है।

‘महात्मा’ का समास विग्रह क्या है?

महात्मा का समास विग्रह है — महान है जो आत्मा। यह विशेषण-विशेष्य कर्मधारय समास का उदाहरण है।

Pooja Singh writes for desidose.in, moving easily between lifestyle, sport, travel and whatever is trending that day. She turns the week’s noise into clear, lively stories you actually want to read.