भाववाचक संज्ञा वे शब्द हैं जो किसी भाव, गुण, दशा, अवस्था या विचार का बोध कराते हैं; जैसे — प्यार, दुःख, बुढ़ापा, मिठास, बचपन। इन्हें छूया या देखा नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है। नीचे 110 उदाहरण एक तालिका में, बनाने के पाँचों नियम और पहचानने की आसान ट्रिक दी गई है।

भाववाचक संज्ञा के 100 उदाहरण (Bhavvachak Sangya ke Udaharan)
नीचे 110 भाववाचक संज्ञा शब्द वाक्य सहित दिए गए हैं — यानी माँगे गए 100 से दस ज़्यादा। हर शब्द किसी भाव, गुण, दशा या अवस्था का नाम है, इसलिए ये सभी बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षा में सुरक्षित रूप से लिखे जा सकते हैं।
| क्रमांक | भाववाचक शब्द | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| 1 | प्यार | माँ का प्यार अनमोल होता है। |
| 2 | दुःख | उसकी आँखों में दुःख था। |
| 3 | आश्चर्य | उसके अचानक आने से सबको आश्चर्य हुआ। |
| 4 | शोक | पिता जी के जाने का शोक सभी को है। |
| 5 | उत्साह | खेलने का उत्साह बच्चों में देखते ही बनता है। |
| 6 | सुन्दरता | फूल की सुन्दरता देखते ही बनती है। |
| 7 | मिठास | गुड़ की मिठास अलग ही होती है। |
| 8 | कड़वाहट | नीम में कड़वाहट होती है। |
| 9 | खटास | नींबू के रस में खटास होती है। |
| 10 | चतुराई | लोमड़ी की चतुराई प्रसिद्ध है। |
| 11 | बुराई | बुराई करने से बचना चाहिए। |
| 12 | भलाई | दूसरों की भलाई करनी चाहिए। |
| 13 | मित्रता | सच्ची मित्रता हमेशा काम आती है। |
| 14 | शत्रुता | शत्रुता से कुछ हासिल नहीं होता। |
| 15 | ईमानदारी | ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है। |
| 16 | बेईमानी | बेईमानी से धन कमाना ठीक नहीं है। |
| 17 | सफलता | मेहनत से सफलता मिलती है। |
| 18 | विफलता | विफलता से सीख लेनी चाहिए। |
| 19 | समृद्धि | देश की समृद्धि सभी का लक्ष्य है। |
| 20 | गरीबी | गरीबी एक अभिशाप है। |
| 21 | स्वतंत्रता | हमें अपनी स्वतंत्रता प्यारी है। |
| 22 | गुलामी | गुलामी का जीवन कठिन होता है। |
| 23 | शांति | शांति से रहना अच्छा लगता है। |
| 24 | अशांति | अशांति से देश का विकास रुकता है। |
| 25 | साहस | सिपाही में बहुत साहस होता है। |
| 26 | कायरता | कायरता छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। |
| 27 | दयालुता | दयालुता मनुष्य का गुण है। |
| 28 | निर्दयता | निर्दयता देखकर दुःख होता है। |
| 29 | उदारता | उदारता से दान देना चाहिए। |
| 30 | संकीर्णता | संकीर्णता छोड़नी चाहिए। |
| 31 | विशालता | समुद्र की विशालता देखने लायक है। |
| 32 | छोटापन | छोटापन दिखाना अच्छा नहीं है। |
| 33 | गहराई | समुद्र की गहराई अधिक है। |
| 34 | ऊँचाई | पहाड़ की ऊँचाई बहुत ज्यादा है। |
| 35 | लम्बाई | उसकी लम्बाई अधिक है। |
| 36 | चौड़ाई | मैदान की चौड़ाई कम है। |
| 37 | मोटापा | मोटापा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। |
| 38 | पतलापन | पतलापन दिखाने की जरूरत नहीं है। |
| 39 | गर्मी | गर्मी में पंखा चलाना पड़ता है। |
| 40 | सर्दी | सर्दी में कंबल ओढ़ना अच्छा लगता है। |
| 41 | नमी | हवा में नमी है। |
| 42 | सूखा | सूखा पड़ने से फसल नष्ट हो गई। |
| 43 | तेजस्विता | सूर्य की तेजस्विता प्रखर है। |
| 44 | मंदता | काम में मंदता ठीक नहीं है। |
| 45 | चमक | सोने की चमक तेज होती है। |
| 46 | धुँधलापन | कोहरे के कारण धुँधलापन है। |
| 47 | स्पष्टता | उसके विचारों में स्पष्टता है। |
| 48 | अस्पष्टता | अस्पष्टता से बचना चाहिए। |
| 49 | शुद्धता | पानी की शुद्धता जांचनी चाहिए। |
| 50 | अशुद्धता | अशुद्धता स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। |
| 51 | महक | फूलों की महक सुगंधित है। |
| 52 | बदबू | कूड़े से बदबू आ रही है। |
| 53 | कोमलता | फूल की पंखुड़ियों में कोमलता है। |
| 54 | कठोरता | पत्थर में कठोरता होती है। |
| 55 | चिकनाहट | तेल में चिकनाहट होती है। |
| 56 | खुरदरापन | दीवार में खुरदरापन है। |
| 57 | भारीपन | बक्से में भारीपन है। |
| 58 | हल्कापन | पंख में हल्कापन होता है। |
| 59 | ताजगी | सुबह की हवा में ताजगी है। |
| 60 | थकान | काम के बाद थकान होती है। |
| 61 | मुस्कुराहट | उसकी मुस्कुराहट सबका मन मोह लेती है। |
| 62 | स्फूर्ति | व्यायाम से स्फूर्ति आती है। |
| 63 | सुस्ती | सुस्ती छोड़कर काम करना चाहिए। |
| 64 | चुस्ती | चुस्ती से काम करने पर सफलता मिलती है। |
| 65 | फुर्ती | बंदर में बहुत फुर्ती होती है। |
| 66 | आलस्य | आलस्य मनुष्य का शत्रु है। |
| 67 | परिश्रम | परिश्रम से सब कुछ मिलता है। |
| 68 | आराम | काम के बाद आराम करना चाहिए। |
| 69 | बेचैनी | बेचैनी होने पर नींद नहीं आती। |
| 70 | धैर्य | धैर्य रखने वाले को सब कुछ मिलता है। |
| 71 | घबराहट | अचानक खबर सुनकर घबराहट हुई। |
| 72 | डर | अंधेरे में डर लगता है। |
| 73 | निर्भयता | सिपाही में निर्भयता होती है। |
| 74 | हिम्मत | हिम्मत से काम लेना चाहिए। |
| 75 | निराशा | निराशा छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। |
| 76 | आशा | आशा रखने से काम बनता है। |
| 77 | निर्धनता | निर्धनता दूर करने का प्रयास करना चाहिए। |
| 78 | अमीरी | अमीरी का घमंड नहीं करना चाहिए। |
| 79 | सज्जनता | सज्जनता मनुष्य का गुण है। |
| 80 | दुर्जनता | दुर्जनता से बचना चाहिए। |
| 81 | विनम्रता | विनम्रता से बात करनी चाहिए। |
| 82 | अभिमान | अभिमान करना ठीक नहीं है। |
| 83 | विवेक | विवेक से काम लेना चाहिए। |
| 84 | अविवेक | अविवेक से अनर्थ होता है। |
| 85 | ज्ञान | ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। |
| 86 | अज्ञान | अज्ञान अंधकार है। |
| 87 | बुद्धिमत्ता | बुद्धिमत्ता से काम लेना चाहिए। |
| 88 | मूर्खता | मूर्खता करने से बचना चाहिए। |
| 89 | चिंता | चिंता करने से बीमारी होती है। |
| 90 | निश्चिंतता | निश्चिंतता से रहना चाहिए। |
| 91 | उमंग | त्योहारों में उमंग होती है। |
| 92 | निरुत्साह | निरुत्साह होने पर काम नहीं बनता। |
| 93 | लगन | लगन से पढ़ाई करनी चाहिए। |
| 94 | मेहनत | मेहनत का फल मीठा होता है। |
| 95 | मस्ती | बचपन में मस्ती होती है। |
| 96 | बुढ़ापा | बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है। |
| 97 | जवानी | जवानी में शक्ति अधिक होती है। |
| 98 | बचपन | बचपन के दिन यादगार होते हैं। |
| 99 | यौवन | यौवन ऊर्जा से भरा होता है। |
| 100 | मृत्यु | मृत्यु जीवन की सच्चाई है। |
| 101 | ममता | माँ की ममता अतुलनीय होती है। |
| 102 | अपनापन | उसके व्यवहार में अपनापन झलकता है। |
| 103 | परायापन | भीड़ में भी परायापन महसूस होता है। |
| 104 | क्रोध | क्रोध में लिया गया निर्णय गलत होता है। |
| 105 | घृणा | घृणा से किसी का भला नहीं होता। |
| 106 | लज्जा | उसके चेहरे पर लज्जा छा गई। |
| 107 | क्षमा | क्षमा वीरों का आभूषण है। |
| 108 | ईर्ष्या | ईर्ष्या मन को जलाती रहती है। |
| 109 | करुणा | संत के मन में करुणा भरी थी। |
| 110 | श्रद्धा | भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती है। |
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भाववाचक संज्ञा की परिभाषा (Bhavvachak Sangya ki Paribhasha)

भाववाचक संज्ञा उस संज्ञा शब्द को कहते हैं जो किसी पदार्थ का बोध न कराकर उसके गुण, दोष, भाव, दशा, अवस्था, स्वभाव या किसी विचार का बोध कराती है। सरल शब्दों में — जो शब्द किसी भावना या अनुभूति का नाम होता है, वह भाववाचक संज्ञा कहलाता है। जैसे मिठास (गुण), बुराई (दोष), बचपन (अवस्था)। यह हमेशा अमूर्त होती है, यानी इसे इंद्रियों से देखा, छुआ या चखा नहीं जा सकता — केवल अनुभव किया जा सकता है। इसी वजह से यह व्यक्तिवाचक संज्ञा और समूहवाचक संज्ञा से अलग होती है, जो किसी वास्तविक व्यक्ति, वस्तु या समूह की ओर संकेत करती हैं।
भाववाचक संज्ञा के कितने प्रकार होते हैं?
भाववाचक संज्ञा के कोई अलग प्रकार या भेद नहीं होते। यह स्वयं संज्ञा का एक भेद है, इसलिए इसका आगे कोई उपविभाजन नहीं किया जाता। कई वेबसाइटों पर इसके “समुदायवाचक” या “द्रव्यवाचक” प्रकार बताए जाते हैं — ये किसी मान्य पाठ्यपुस्तक में नहीं मिलते और परीक्षा में लिखने पर अंक कट सकते हैं।
परीक्षा में जो वास्तव में पूछा जाता है वह है — भाववाचक संज्ञा किन-किन शब्दों से बनती है। इसके पाँच स्रोत हैं: जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय। इन्हीं पाँचों को नीचे उदाहरण सहित समझाया गया है।
भाववाचक संज्ञा बनाने के नियम (प्रत्यय तालिका)
भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए मूल शब्द के अंत में प्रत्यय जोड़ा जाता है। याद रखने की ट्रिक — “ता, पन, आस, त्व, हट, आवट देखो — भाव बन गया!” नीचे हर प्रत्यय और उसका सही उदाहरण दिया गया है।
| प्रत्यय | मूल शब्द | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|---|
| ता | सुंदर, मित्र, मनुष्य | सुंदरता, मित्रता, मनुष्यता |
| पन | बच्चा, लड़का, अपना | बचपन, लड़कपन, अपनापन |
| आपा | बूढ़ा, मोटा | बुढ़ापा, मोटापा |
| आस | मीठा, खट्टा | मिठास, खटास |
| आई | भला, चतुर, पढ़ना | भलाई, चतुराई, पढ़ाई |
| त्व | मनुष्य, देव, गुरु | मनुष्यत्व, देवत्व, गुरुत्व |
| हट | घबराना, चिकना, कड़वा | घबराहट, चिकनाहट, कड़वाहट |
| आवट | सजना, बनना, लिखना | सजावट, बनावट, लिखावट |
| य | सुंदर, मधुर | सौंदर्य, माधुर्य |
| ई | गरम, चोर, बोलना | गरमी, चोरी, बोली |
1. जातिवाचक संज्ञा से भाववाचक संज्ञा
| जातिवाचक संज्ञा | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| मित्र | मित्रता |
| बच्चा | बचपन |
| देव | देवत्व |
| नौकर | नौकरी |
| शत्रु | शत्रुता |
| मनुष्य | मनुष्यता |
2. सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा
यह वह भाग है जो ज़्यादातर लेखों में छूट जाता है, जबकि परीक्षा में सीधे पूछा जाता है।
| सर्वनाम | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| अपना | अपनापन / अपनत्व |
| पराया | परायापन |
| मम | ममता |
| निज | निजत्व |
| स्व | स्वत्व |
| सर्व | सर्वस्व |
3. विशेषण से भाववाचक संज्ञा
| विशेषण | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| मीठा | मिठास |
| गरम | गरमी |
| सुन्दर | सुन्दरता |
| चतुर | चतुराई |
| ऊँचा | ऊँचाई |
| मधुर | माधुर्य |
विशेषण से बनने वाले रूपों को समझने के लिए विशेषण के कितने भेद होते हैं वाला लेख भी पढ़ें।
4. क्रिया से भाववाचक संज्ञा
| क्रिया | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| लड़ना | लड़ाई |
| कमाना | कमाई |
| बोलना | बोली |
| पढ़ना | पढ़ाई |
| सजना | सजावट |
| घबराना | घबराहट |
5. अव्यय से भाववाचक संज्ञा
| अव्यय | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|
| निकट | निकटता |
| दूर | दूरी |
| शीघ्र | शीघ्रता |
| समीप | समीपता |
| धीरे | धीरज |
| मना | मनाही |

भाववाचक संज्ञा पहचानने की 5 आसान ट्रिक्स
- क्या शब्द किसी भाव, गुण, दशा या अवस्था का नाम है?
- क्या उसे छू या देख सकते हैं? → नहीं → भाववाचक संज्ञा
- क्या अंत में ता, पन, आपा, आस, त्व, हट, आवट जैसा प्रत्यय है?
- क्या मूल शब्द जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया या अव्यय है?
- वाक्य में लगाकर देखें — यदि भाव का बोध हो तो भाववाचक संज्ञा है।
यदि इनमें से अधिकांश उत्तर “हाँ” हैं, तो वह शब्द भाववाचक संज्ञा है।
और पढ़ें: भाववाचक संज्ञा के 100 उदाहरण
जहाँ सबसे ज़्यादा गलती होती है: मिठास बनाम मिठाई
एक ही मूल शब्द से बने दो रूपों में से अक्सर गलत वाला चुन लिया जाता है। नियम आसान है — जो शब्द किसी वस्तु का नाम बन जाए वह भाववाचक नहीं रहता। “मिठास” एक गुण है, इसलिए भाववाचक संज्ञा है; “मिठाई” एक वस्तु है जिसे खाया जा सकता है, इसलिए वह जातिवाचक संज्ञा है।
| मूल शब्द | भाववाचक संज्ञा (सही) | जातिवाचक संज्ञा (गलत उत्तर) |
|---|---|---|
| मीठा | मिठास | मिठाई |
| सजना | सजावट | साज-सामान |
| बुनना | बुनाई | बुनकर |
| लिखना | लिखावट | लेखक |
| चोर | चोरी | चोर |
भाववाचक संज्ञा और गुणवाचक विशेषण में क्या अंतर है?
भाववाचक संज्ञा किसी गुण का नाम होती है, जबकि गुणवाचक विशेषण किसी संज्ञा के गुण को बताता है। जैसे “मिठास” भाववाचक संज्ञा है — यह गुण का नाम है। वहीं “मीठा” विशेषण है, जो किसी संज्ञा के गुण को बताता है — जैसे “मीठा फल”। पहचान का सबसे आसान तरीका: यदि शब्द अकेला वाक्य का कर्ता बन सकता है (मिठास बढ़ गई) तो वह संज्ञा है; यदि उसे किसी नाम के साथ जोड़ना पड़े (मीठा आम) तो वह विशेषण है।
भाववाचक संज्ञा से सम्बंधित प्रश्न (FAQs)
भाववाचक संज्ञा वे शब्द हैं जो किसी भाव, गुण, दशा, अवस्था या विचार का बोध कराते हैं। ये किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का बोध नहीं कराते। इन्हें हम केवल महसूस कर सकते हैं, देख या छू नहीं सकते। जैसे प्रेम, ईमानदारी, बचपन, मोटापा, गर्मी।
भाववाचक संज्ञा के 10 सामान्य उदाहरण हैं: 1. प्यार, 2. दुःख, 3. बुढ़ापा, 4. मिठास, 5. बचपन, 6. सुन्दरता, 7. बुराई, 8. मित्रता, 9. ईमानदारी, 10. लम्बाई। ये सभी शब्द किसी न किसी भाव, गुण या अवस्था का बोध कराते हैं।
भाववाचक संज्ञा के कोई अलग प्रकार या भेद नहीं होते। यह स्वयं संज्ञा का एक भेद है, इसलिए इसका आगे उपविभाजन नहीं किया जाता। परीक्षा में जो पूछा जाता है वह यह है कि भाववाचक संज्ञा किन शब्दों से बनती है — इसके पाँच स्रोत हैं: जातिवाचक संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया और अव्यय।
सर्वनाम शब्दों में पन, ता या त्व प्रत्यय जोड़कर भाववाचक संज्ञा बनाई जाती है। जैसे अपना से अपनापन, पराया से परायापन, मम से ममता, निज से निजत्व, स्व से स्वत्व और सर्व से सर्वस्व।
नहीं, मिठाई भाववाचक संज्ञा नहीं है। मिठाई एक वस्तु है जिसे देखा और खाया जा सकता है, इसलिए वह जातिवाचक संज्ञा है। मीठा से बनी भाववाचक संज्ञा मिठास है, क्योंकि मिठास एक गुण है जिसे केवल महसूस किया जा सकता है।
हाँ, भाववाचक संज्ञाएँ सदैव अमूर्त होती हैं क्योंकि ये भावनाओं, गुणों और अवस्थाओं के नाम हैं। इन्हें हम देख, सुन, छू, सूँघ या चख नहीं सकते, केवल महसूस कर सकते हैं। जैसे गर्मी को महसूस किया जा सकता है, पर उसे हाथ में नहीं लिया जा सकता।
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PASTE: भाववाचक संज्ञा wale section ke turant baad
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निष्कर्ष
भाववाचक संज्ञा पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीका यही है — शब्द को छूकर या देखकर सत्यापित नहीं किया जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है। ऊपर दी गई 110 शब्दों की सूची और प्रत्यय तालिका याद कर लें, परीक्षा में इससे बाहर कुछ कम ही पूछा जाता है। संज्ञा के बाकी भेदों के लिए संज्ञा किसे कहते हैं पढ़ें, और अभ्यास जारी रखने के लिए द्रव्यवाचक संज्ञा के 109 उदाहरण देखें। कोई शब्द अटक रहा हो तो कमेंट में पूछ लें।
