Dwand Samas Ke Udaharan — द्वंद्व समास के 70+ उदाहरण और 3 भेद

द्वंद्व समास वह समास है जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं, और विग्रह करने पर दोनों के बीच “और”, “या”, “तथा” जैसा योजक शब्द आता है। जैसे — माता-पिता = माता और पिता। बाकी पाँचों समासों में कोई एक पद प्रधान होता है; द्वंद्व अकेला ऐसा भेद है जहाँ दोनों बराबर हैं — यही इसकी सबसे पक्की पहचान है।

नीचे पहले श्रेणी के अनुसार बँटे 71 उदाहरण दिए गए हैं, फिर परिभाषा, तीनों भेद (इतरेतर, समाहार, वैकल्पिक), और वह तुलना-तालिका जो परीक्षा में सबसे ज़्यादा नंबर बचाती है — कि एक ही जैसा दिखने वाला शब्द द्वंद्व है, कर्मधारय है या तत्पुरुष।

द्वंद्व समास के 70+ उदाहरण

1. रिश्ते और लोग (15)

समस्त पदविग्रह
माता-पितामाता और पिता
भाई-बहनभाई और बहन
पति-पत्नीपति और पत्नी
नर-नारीनर और नारी
स्त्री-पुरुषस्त्री और पुरुष
राजा-रानीराजा और रानी
गुरु-शिष्यगुरु और शिष्य
माँ-बापमाँ और बाप
दादा-दादीदादा और दादी
नाना-नानीनाना और नानी
सास-बहूसास और बहू
देवर-भाभीदेवर और भाभी
बेटा-बेटीबेटा और बेटी
भाई-भतीजाभाई और भतीजा
लड़का-लड़कीलड़का और लड़की

2. विपरीत अर्थ वाले जोड़े (15)

समस्त पदविग्रह
सुख-दुखसुख और दुख
यश-अपयशयश और अपयश
लाभ-हानिलाभ और हानि
जीवन-मरणजीवन और मरण
पाप-पुण्यपाप और पुण्य
अमीर-गरीबअमीर और गरीब
धनी-निर्धनधनी और निर्धन
ऊँच-नीचऊँच और नीच
दिन-रातदिन और रात
हार-जीतहार और जीत
सच-झूठसच और झूठ
राग-द्वेषराग और द्वेष
आगा-पीछाआगा और पीछा
आना-जानाआना और जाना
चढ़ाव-उतारचढ़ाव और उतार

3. खान-पान और रोज़मर्रा (15)

समस्त पदविग्रह
खान-पानखान और पान
दाल-रोटीदाल और रोटी
दूध-दहीदूध और दही
अन्न-जलअन्न और जल
नमक-मिर्चनमक और मिर्च
चाय-पानीचाय और पानी
रोटी-कपड़ारोटी और कपड़ा
कपड़ा-लत्ताकपड़ा और लत्ता
हाट-बाज़ारहाट और बाज़ार
लेन-देनलेन और देन
घर-बारघर और बार (गृहस्थी)
साग-सब्ज़ीसाग और सब्ज़ी
हँसी-मज़ाकहँसी और मज़ाक
बर्तन-भाँडाबर्तन और भाँडा
मान-सम्मानमान और सम्मान

4. प्रकृति और शरीर (12)

समस्त पदविग्रह
नदी-नालेनदी और नाले
पेड़-पौधेपेड़ और पौधे
फल-फूलफल और फूल
कंद-मूलकंद और मूल
आग-पानीआग और पानी
धूप-छाँवधूप और छाँव
गाय-बैलगाय और बैल
हाथ-पाँवहाथ और पाँव
नाक-काननाक और कान
सिर-पैरसिर और पैर
आँख-कानआँख और कान
तन-मनतन और मन

5. तत्सम और पौराणिक शब्द (14)

ये वे उदाहरण हैं जो परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं, क्योंकि इनमें हाइफ़न नहीं होता — फिर भी ये द्वंद्व समास ही हैं।

समस्त पदविग्रह
धनुर्बाणधनुष और बाण
अहर्निशअहः (दिन) और निशा (रात)
शीतोष्णशीत और उष्ण
देवासुरदेव और असुर
कृष्णार्जुनकृष्ण और अर्जुन
सीतारामसीता और राम
राधा-कृष्णराधा और कृष्ण
हरि-हरहरि (विष्णु) और हर (शिव)
लक्ष्मी-नारायणलक्ष्मी और नारायण
गौरी-शंकरगौरी और शंकर
राम-लक्ष्मणराम और लक्ष्मण
ऋषि-मुनिऋषि और मुनि
वेद-पुराणवेद और पुराण
स्वर्ग-नरकस्वर्ग और नरक

द्वंद्व समास की परिभाषा

जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करते समय उनके बीच “और”, “या”, “तथा”, “अथवा” जैसा योजक शब्द लगाना पड़े, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। समस्त पद बनाते समय यह योजक शब्द लुप्त हो जाता है और उसकी जगह प्रायः योजक चिह्न (-) रख दिया जाता है।

“दोनों पद प्रधान” का मतलब क्या है? इसका सीधा अर्थ यह है कि किसी एक पद को हटा देने पर अर्थ अधूरा नहीं, बल्कि बदल जाता है। “माता-पिता” में न माता गौण है, न पिता — दोनों बराबर की इकाई हैं। इसकी तुलना राजपुत्र से कीजिए, जहाँ मुख्य बात “पुत्र” है और “राजा” सिर्फ़ बताता है कि किसका पुत्र।

द्वंद्व समास के 3 भेद

विग्रह में कौन सा योजक शब्द आता है — इसी आधार पर द्वंद्व समास के तीन भेद किए जाते हैं।

भेदविग्रह में क्या आता हैउदाहरण
इतरेतर द्वंद्वऔर / तथा — दोनों पद अपना अलग अस्तित्व रखते हैंमाता-पिता, राम-लक्ष्मण, गाय-बैल, ऋषि-मुनि
समाहार द्वंद्वदोनों के साथ एक तीसरा “समूह” का भाव भी — यानी “आदि”दाल-रोटी, हाथ-पाँव, कपड़ा-लत्ता, बर्तन-भाँडा
वैकल्पिक द्वंद्वया / अथवा — प्रायः विपरीतार्थक शब्दपाप-पुण्य, हार-जीत, सच-झूठ, थोड़ा-बहुत

इतरेतर और समाहार में फ़र्क कैसे पकड़ें? “हाथ-पाँव” कहने पर वक्ता का मतलब सिर्फ़ हाथ और पाँव नहीं होता — “उसके हाथ-पाँव फूल गए” में पूरा शरीर आ जाता है। जहाँ दो पद मिलकर एक व्यापक श्रेणी बना दें, वहाँ समाहार द्वंद्व है। जहाँ दोनों अपनी अलग पहचान बनाए रखें (“माता-पिता आए” — दो व्यक्ति), वहाँ इतरेतर है। समाहार द्वंद्व का समस्त पद प्रायः एकवचन की तरह बरता जाता है, इतरेतर का बहुवचन की तरह।

द्वंद्व समास पहचानने की 4 ट्रिक

  1. बीच में “और” लगाकर देखिए। अगर वाक्य सीधा बन जाए (माता और पिता), तो द्वंद्व है। अगर “का/के/को/से” लगाना पड़े (राजा का पुत्र), तो तत्पुरुष है।
  2. दोनों पद एक ही श्रेणी के हैं क्या? द्वंद्व में दोनों प्रायः एक ही वर्ग के होते हैं — दो रिश्ते, दो भाव, दो वस्तुएँ। एक विशेषण + एक संज्ञा हो (नीला + कमल), तो वह कर्मधारय है।
  3. पदों की जगह बदलकर देखिए। द्वंद्व में क्रम बदलने पर भी अर्थ लगभग वही रहता है (भाई-बहन / बहन-भाई)। बाकी समासों में क्रम बदलते ही अर्थ टूट जाता है।
  4. हाइफ़न पर मत जाइए। यह सबसे बड़ा जाल है — धनुर्बाण, अहर्निश, देवासुर और शीतोष्ण में हाइफ़न नहीं है, फिर भी ये द्वंद्व समास हैं।

द्वंद्व बनाम कर्मधारय बनाम तत्पुरुष — असली फ़र्क

समास के प्रश्न में गलती शब्द पहचानने में नहीं होती, भेद चुनने में होती है। नीचे चारों भेद एक ही पैमाने पर रखे गए हैं, ताकि एक नज़र में तय हो जाए कि कौन सा लगेगा।

पहचान का बिंदुद्वंद्वकर्मधारयतत्पुरुषद्विगु
कौन सा पद प्रधानदोनोंउत्तरपदउत्तरपदउत्तरपद
विग्रह में क्या जुड़ता हैऔर / या / तथाजो / रूपी (विशेषण-विशेष्य)कारक चिह्न — का, को, से, के लिएसमूह / समाहार
पहला पद कैसा होता हैसंज्ञा (बराबरी का)गुणवाचक विशेषणसंज्ञा (गौण)संख्यावाचक
उदाहरणमाता-पितानीलकमलराजपुत्रत्रिभुज

हर भेद का पूरा नियम और उदाहरण अलग-अलग लेखों में हैं — तत्पुरुष समास (कारक चिह्न का लोप), कर्मधारय समास (विशेषण-विशेष्य संबंध) और द्विगु समास (संख्यावाची पूर्वपद)।

जहाँ सबसे ज़्यादा गलती होती है

शब्दज़्यादातर लोग समझते हैंअसल मेंक्यों
राजपुत्रद्वंद्व — दो शब्द जुड़े हैंतत्पुरुषविग्रह “राजा और पुत्र” नहीं, “राजा का पुत्र” है
नीलकमलद्वंद्वकर्मधारय“नीला और कमल” नहीं, “नीला कमल” — एक विशेषण है
दोपहरद्वंद्वद्विगुपहला पद संख्या है — “दो पहरों का समाहार”
लंबोदरद्वंद्वबहुव्रीहियह किसी तीसरे (गणेश) की ओर इशारा करता है
दाल-रोटीइतरेतर द्वंद्वसमाहार द्वंद्वअर्थ सिर्फ़ दाल+रोटी नहीं, पूरा भोजन है
धनुर्बाणतत्पुरुष — हाइफ़न नहीं हैद्वंद्वविग्रह “धनुष और बाण” — हाइफ़न होना ज़रूरी नहीं

अभ्यास के लिए 12 प्रश्न

  1. “माता-पिता” का समास विग्रह क्या है?
    उत्तर: माता और पिता (द्वंद्व समास)।
  2. द्वंद्व समास में कौन सा पद प्रधान होता है?
    उत्तर: दोनों पद प्रधान होते हैं — यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
  3. द्वंद्व समास के कितने भेद होते हैं?
    उत्तर: तीन — इतरेतर, समाहार और वैकल्पिक द्वंद्व।
  4. “धनुर्बाण” में कौन सा समास है?
    उत्तर: द्वंद्व समास (धनुष और बाण)। हाइफ़न न होने से यह तत्पुरुष नहीं बन जाता।
  5. “दाल-रोटी” किस भेद का उदाहरण है?
    उत्तर: समाहार द्वंद्व — क्योंकि इसका अर्थ केवल दाल और रोटी नहीं, पूरा भोजन है।
  6. निम्नलिखित में कौन सा द्वंद्व समास नहीं है — भाई-बहन, नीलकमल, दिन-रात, लाभ-हानि?
    उत्तर: नीलकमल — यह कर्मधारय समास है (नीला कमल)।
  7. “अहर्निश” का विग्रह कीजिए।
    उत्तर: अहः (दिन) और निशा (रात) — द्वंद्व समास।
  8. वैकल्पिक द्वंद्व में विग्रह के समय कौन सा शब्द जुड़ता है?
    उत्तर: “या” अथवा “अथवा” — जैसे पाप-पुण्य = पाप या पुण्य।
  9. “राजपुत्र” द्वंद्व समास क्यों नहीं है?
    उत्तर: क्योंकि इसका विग्रह “राजा का पुत्र” है, “राजा और पुत्र” नहीं। यहाँ केवल उत्तरपद प्रधान है, इसलिए यह तत्पुरुष समास है।
  10. “शीतोष्ण” में कौन सा समास है?
    उत्तर: द्वंद्व समास (शीत और उष्ण)।
  11. इतरेतर और समाहार द्वंद्व में मुख्य अंतर क्या है?
    उत्तर: इतरेतर में दोनों पद अपनी अलग पहचान रखते हैं (माता-पिता = दो व्यक्ति), जबकि समाहार में दोनों मिलकर एक व्यापक समूह का बोध कराते हैं (हाथ-पाँव = पूरा शरीर)।
  12. “देवासुर” का समास विग्रह क्या है?
    उत्तर: देव और असुर — द्वंद्व समास।

समास के बाकी पाँच भेद भी पढ़ें:
👉 तत्पुरुष समास के 10 उदाहरण
👉 कर्मधारय समास के उदाहरण
👉 द्विगु समास के 30+ उदाहरण
👉 बहुव्रीहि समास के 70+ उदाहरण
👉 अव्ययीभाव समास के 60+ उदाहरण
👉 हिंदी व्याकरण की पूरी गाइड

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

द्वंद्व समास किसे कहते हैं?

जिस समास में दोनों पद प्रधान हों और विग्रह करते समय उनके बीच ‘और’, ‘या’ या ‘तथा’ जैसा योजक शब्द आए, उसे द्वंद्व समास कहते हैं। जैसे — माता-पिता (माता और पिता)।

द्वंद्व समास के कितने भेद होते हैं?

तीन भेद होते हैं — इतरेतर द्वंद्व (और), समाहार द्वंद्व (समूह का भाव) और वैकल्पिक द्वंद्व (या/अथवा)।

क्या हर हाइफ़न वाला शब्द द्वंद्व समास होता है?

नहीं। हाइफ़न सिर्फ़ एक संकेत है, नियम नहीं। धनुर्बाण, अहर्निश, देवासुर और शीतोष्ण में हाइफ़न नहीं है फिर भी ये द्वंद्व समास हैं, जबकि कई हाइफ़न वाले शब्द केवल पुनरुक्त शब्द होते हैं।

द्वंद्व और कर्मधारय समास में क्या अंतर है?

द्वंद्व में दोनों पद प्रधान होते हैं और विग्रह में ‘और’ आता है (माता-पिता)। कर्मधारय में उत्तरपद प्रधान होता है और पहला पद उसका विशेषण होता है (नीलकमल = नीला कमल)।

‘हाथ-पाँव’ में कौन सा भेद है?

समाहार द्वंद्व। इसका अर्थ केवल हाथ और पाँव नहीं, बल्कि पूरे शरीर का समूह-भाव है — इसीलिए यह इतरेतर नहीं, समाहार द्वंद्व है।

निष्कर्ष

द्वंद्व समास याद रखने के लिए सिर्फ़ एक कसौटी काफ़ी है — बीच में “और” लगाकर देखिए। अगर वाक्य सहज बन जाए तो द्वंद्व है, और अगर “का/के/को” लगाना पड़े तो तत्पुरुष। बाकी दोनों भेदों (इतरेतर बनाम समाहार) का फ़ैसला इस बात से होता है कि दोनों पद अपनी अलग पहचान रखते हैं या मिलकर एक बड़ी श्रेणी बना देते हैं। हाइफ़न को नियम मान लेना ही वह एक गलती है जो सबसे ज़्यादा नंबर काटती है।

Pooja Singh writes for desidose.in, moving easily between lifestyle, sport, travel and whatever is trending that day. She turns the week’s noise into clear, lively stories you actually want to read.