तत्पुरुष समास के 10 उदाहरण

तत्पुरुष समास के 100+ उदाहरण – 6 भेद, विग्रह और पहचान

तत्पुरुष समास वह समास है जिसमें पूर्वपद (पहला शब्द) गौण होता है और उत्तरपद (दूसरा शब्द) प्रधान, तथा दोनों के बीच का कारक चिह्न — को, से, के लिए, का, में, पर — लुप्त हो जाता है। जैसे राजपुत्र = राजा का पुत्र। इसके ठीक उलट, जहाँ पूर्वपद प्रधान हो और वह अव्यय हो, वहाँ अव्ययीभाव समास होता है — यही दोनों को अलग करने की सबसे पक्की कसौटी है।

नीचे दिए गए हैं तत्पुरुष समास के 128 उदाहरण — छहों भेद और नञ् तत्पुरुष, हर एक का विग्रह साथ में। पहले परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले 10 उदाहरण, उसके बाद भेद-वार पूरी सूची।

Table of Contents

परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले 10 उदाहरण

क्र.समस्तपद (समास)विग्रहलुप्त चिह्नभेद
1गगनचुंबीगगन को चूमने वालाकोकर्म तत्पुरुष
2माखनचोरमाखन को चुराने वालाकोकर्म तत्पुरुष
3हस्तलिखितहाथ से लिखा हुआसेकरण तत्पुरुष
4मदांधमद से अंधासेकरण तत्पुरुष
5रसोईघररसोई के लिए घरके लिएसंप्रदान तत्पुरुष
6देशभक्तिदेश के लिए भक्तिके लिएसंप्रदान तत्पुरुष
7पथभ्रष्टपथ से भ्रष्टसे (अलग होना)अपादान तत्पुरुष
8ऋणमुक्तऋण से मुक्तसे (अलग होना)अपादान तत्पुरुष
9राजपुत्रराजा का पुत्रकासंबंध तत्पुरुष
10जलमग्नजल में मग्नमेंअधिकरण तत्पुरुष

ध्यान दें: उदाहरण हमेशा समस्तपद होता है (जैसे “राजपुत्र”), उसका विग्रह नहीं (“राजा का पुत्र”)। परीक्षा में अक्सर यही उलटा लिख देने पर अंक कटते हैं।

तत्पुरुष समास के 100+ उदाहरण (विग्रह सहित)

यहाँ कुल 128 उदाहरण हैं, भेद के हिसाब से अलग-अलग टेबल में — ताकि आप जिस भेद पर अटके हों सीधे वहीं जा सकें। हर उदाहरण के साथ उसका विग्रह भी दिया है, क्योंकि परीक्षा में विग्रह लिखे बिना पूरे अंक नहीं मिलते।

कर्म तत्पुरुष (द्वितीया) — चिह्न “को” — 18 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
गगनचुंबीगगन को चूमने वाला
माखनचोरमाखन को चुराने वाला
जेबकतराजेब को कतरने वाला
गिरहकटगिरह को काटने वाला
चिड़ीमारचिड़ी को मारने वाला
मुँहतोड़मुँह को तोड़ने वाला
सिरतोड़सिर को तोड़ने वाला
कठफोड़वाकाठ को फोड़ने वाला
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
यशप्राप्तयश को प्राप्त
ग्रामगतग्राम को गया हुआ
देशगतदेश को गया हुआ
वनगमनवन को गमन
परलोकगमनपरलोक को गमन
शरणागतशरण को आया हुआ
मनोहरमन को हरने वाला
ग्रंथकारग्रंथ को करने वाला
जनप्रियजन को प्रिय

करण तत्पुरुष (तृतीया) — चिह्न “से”, “के द्वारा” — 18 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
हस्तलिखितहाथ से लिखा हुआ
मदांधमद से अंधा
रेखांकितरेखा से अंकित
कष्टसाध्यकष्ट से साध्य
तुलसीकृततुलसी के द्वारा रचित
सूररचितसूर के द्वारा रचित
मनचाहामन से चाहा
भुखमराभूख से मरा
रोगग्रस्तरोग से ग्रस्त
ज्वरग्रस्तज्वर से ग्रस्त
शोकाकुलशोक से आकुल
करुणापूर्णकरुणा से पूर्ण
दयार्द्रदया से आर्द्र
जलसिक्तजल से सिक्त
रक्तरंजितरक्त से रंजित
मेघाच्छन्नमेघ से आच्छन्न
अकालपीड़ितअकाल से पीड़ित
आचारकुशलआचार से कुशल

संप्रदान तत्पुरुष (चतुर्थी) — चिह्न “के लिए” — 18 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
रसोईघररसोई के लिए घर
देशभक्तिदेश के लिए भक्ति
विद्यालयविद्या के लिए आलय
पुस्तकालयपुस्तक के लिए आलय
देवालयदेव के लिए आलय
हथकड़ीहाथ के लिए कड़ी
सत्याग्रहसत्य के लिए आग्रह
गुरुदक्षिणागुरु के लिए दक्षिणा
यज्ञशालायज्ञ के लिए शाला
प्रयोगशालाप्रयोग के लिए शाला
गौशालागौ के लिए शाला
स्नानघरस्नान के लिए घर
सभाभवनसभा के लिए भवन
विश्रामगृहविश्राम के लिए गृह
मालगाड़ीमाल के लिए गाड़ी
डाकगाड़ीडाक के लिए गाड़ी
क्रीड़ाक्षेत्रक्रीड़ा के लिए क्षेत्र
बलिपशुबलि के लिए पशु

अपादान तत्पुरुष (पंचमी) — चिह्न “से” (अलग होने के अर्थ में) — 18 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
ऋणमुक्तऋण से मुक्त
जन्मांधजन्म से अंधा
भयभीतभय से भीत
देशनिकालादेश से निकाला
पदच्युतपद से च्युत
जातिच्युतजाति से च्युत
स्थानभ्रष्टस्थान से भ्रष्ट
धर्मविमुखधर्म से विमुख
रोगमुक्तरोग से मुक्त
बंधनमुक्तबंधन से मुक्त
पापमुक्तपाप से मुक्त
धनहीनधन से हीन
गुणहीनगुण से हीन
जलहीनजल से हीन
नेत्रहीननेत्र से हीन
आशातीतआशा से अतीत
देशांतरदेश से अंतर

संबंध तत्पुरुष (षष्ठी) — चिह्न “का”, “के”, “की” — 22 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
राजकुमारीराजा की कुमारी
राजगृहराजा का गृह
राजदरबारराजा का दरबार
गंगाजलगंगा का जल
जलधाराजल की धारा
देशसेवादेश की सेवा
गृहस्वामीगृह का स्वामी
घुड़दौड़घोड़ों की दौड़
पूँजीपतिपूँजी का पति
सेनापतिसेना का पति
राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति
विद्यासागरविद्या का सागर
प्रेमसागरप्रेम का सागर
मृगशावकमृग का शावक
देवमूर्तिदेव की मूर्ति
सूर्योदयसूर्य का उदय
चंद्रोदयचंद्र का उदय
आत्मकथाआत्मा की कथा
जीवनसाथीजीवन का साथी
भूदानभू का दान
रामायणराम का अयन

अधिकरण तत्पुरुष (सप्तमी) — चिह्न “में”, “पर” — 20 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
जलमग्नजल में मग्न
शोकमग्नशोक में मग्न
ध्यानमग्नध्यान में मग्न
आनंदमग्नआनंद में मग्न
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
नीतिनिपुणनीति में निपुण
आचारनिपुणआचार में निपुण
कलाप्रवीणकला में प्रवीण
शास्त्रप्रवीणशास्त्र में प्रवीण
दानवीरदान में वीर
रणधीररण में धीर
युधिष्ठिरयुद्ध में स्थिर
नरोत्तमनरों में उत्तम
पुरुषोत्तमपुरुषों में उत्तम
कविश्रेष्ठकवियों में श्रेष्ठ
लोकप्रियलोक में प्रिय
आत्मविश्वासआत्मा पर विश्वास
आपबीतीआप पर बीती
सिरदर्दसिर में दर्द
क्षणभंगुरक्षण में भंगुर

नञ् तत्पुरुष — चिह्न “न” (निषेध) — 14 उदाहरण

समस्तपदविग्रह
अनपढ़न पढ़ा हुआ
असत्यन सत्य
अन्यायन न्याय
अधर्मन धर्म
असंभवन संभव
अज्ञानन ज्ञान
अविश्वासन विश्वास
अनिच्छान इच्छा
अपूर्णन पूर्ण
अस्वस्थन स्वस्थ
अनादिन आदि
अनंतन अंत
नास्तिकन आस्तिक
अनुचितन उचित

तत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो और दोनों पदों के बीच का कारक चिह्न (विभक्ति) लुप्त हो जाए, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

इसे तीन बातों से पहचानिए:

  1. दूसरा शब्द प्रधान होता है — “राजपुत्र” में मुख्य बात “पुत्र” है, “राजा” नहीं।
  2. बीच का कारक चिह्न गायब हो जाता है — “राजा का पुत्र” से “का” हट गया।
  3. विग्रह करने पर वही चिह्न वापस आ जाता है — यही चिह्न बताता है कि कौन-सा भेद है।

एक बात साफ़ कर लें — तत्पुरुष समास में कर्ता कारक (प्रथमा विभक्ति) का लोप नहीं होता। इसीलिए “कर्तृ तत्पुरुष” नाम का कोई भेद नहीं होता। तत्पुरुष के भेद द्वितीया से लेकर सप्तमी तक की छह विभक्तियों पर ही आधारित हैं।

यह भी पढ़ें: कारक के प्रकार और उनके सही प्रयोग की सम्पूर्ण जानकारी
कर्मधारय समास के उदाहरण और पहचान
द्विगु समास के उदाहरण और पहचान
हिंदी व्याकरण की पूरी गाइड — सभी टॉपिक एक जगह

तत्पुरुष समास के 6 भेद

तत्पुरुष समास के भेद उसी कारक (विभक्ति) के नाम पर रखे जाते हैं, जिसका चिह्न लुप्त हुआ है। एक नज़र में:

भेदविभक्तिलुप्त चिह्नउदाहरण
कर्म तत्पुरुषद्वितीयाकोगगनचुंबी
करण तत्पुरुषतृतीयासे, के द्वाराहस्तलिखित
संप्रदान तत्पुरुषचतुर्थीके लिएरसोईघर
अपादान तत्पुरुषपंचमीसे (अलग होने के अर्थ में)पथभ्रष्ट
संबंध तत्पुरुषषष्ठीका, के, कीराजपुत्र
अधिकरण तत्पुरुषसप्तमीमें, परजलमग्न

करण और अपादान में फ़र्क़ — यहीं सबसे ज़्यादा गलती होती है

दोनों भेदों का चिह्न एक ही है — “से”। फ़र्क़ सिर्फ़ अर्थ का है। करण में “से” का मतलब साधन होता है, यानी किस चीज़ की मदद से काम हुआ — “हस्तलिखित = हाथ से लिखा हुआ”। अपादान में “से” का मतलब अलगाव होता है, यानी किससे अलग हुआ — “पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट”। शब्द देखकर खुद से पूछिए: यह माध्यम बता रहा है या जुदाई?

एक और काम की बात: संबंध तत्पुरुष सबसे आम भेद है। परीक्षा में जब कोई उदाहरण समझ न आए, तो सबसे पहले “का / के / की” लगाकर देखिए — दस में से चार बार वही सही निकलेगा।

नञ् तत्पुरुष समास — एक खास भेद

ऊपर के छह भेदों के अलावा एक और भेद परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है — नञ् तत्पुरुष। इसमें पूर्वपद निषेध बताने वाला उपसर्ग होता है, जैसे अ, अन्, न, ना

  • अनपढ़ = पढ़ा हुआ
  • असंभव = संभव
  • अन्याय = न्याय
  • अधर्म = धर्म
  • नास्तिक = आस्तिक

यह भी पढ़ें: उपसर्ग: हिंदी में परिभाषा, प्रकार और उदाहरण

तत्पुरुष और कर्मधारय समास में अंतर

यह वह जगह है जहाँ ज़्यादातर छात्र फँसते हैं। दोनों में उत्तरपद प्रधान होता है, फिर भी दोनों अलग हैं:

आधारतत्पुरुष समासकर्मधारय समास
दोनों पदों का संबंधकारक का संबंध (को, से, के लिए, का, में)विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध
विग्रह में क्या आता हैकारक चिह्न — “राजा का पुत्र”“जो … है” या “रूपी” — “नीला है जो कमल”
उदाहरणराजपुत्र, जलमग्न, देशभक्तिनीलकमल, महापुरुष, चरणकमल
पहचानबीच में विभक्ति लगती हैबीच में विभक्ति नहीं, दोनों पद एक ही वस्तु के लिए

सीधा तरीका — विग्रह करते समय अगर बीच में का/के/की/को/से/में/पर लगाना पड़े तो तत्पुरुष है। अगर “जो … है” लगाना पड़े तो कर्मधारय है।

तत्पुरुष समास पहचानने की 3-स्टेप ट्रिक

  1. शब्द को तोड़िए — “जलमग्न” को “जल” और “मग्न” में बाँटिए।
  2. बीच में चिह्न लगाकर देखिए — को, से, के लिए, का, में, पर — इनमें से कौन-सा फ़िट बैठता है? यहाँ “में” बैठा: जल में मग्न।
  3. चिह्न से भेद पहचानिए — “में” आया, यानी अधिकरण तत्पुरुष। बस हो गया।

अगर कोई भी चिह्न फ़िट न बैठे और दूसरा पद पहले पद की विशेषता बता रहा हो, तो वह तत्पुरुष नहीं — कर्मधारय है।

अभ्यास के लिए 12 प्रश्न

नीचे दिए शब्दों का विग्रह करके भेद बताइए। जवाब उसके नीचे दिए गए हैं।

  1. चिड़ीमार
  2. राजगृह
  3. यज्ञशाला
  4. धर्मविमुख
  5. आत्मविश्वास
  6. शोकाकुल
  7. पदच्युत
  8. कविश्रेष्ठ
  9. गुरुदक्षिणा
  10. रक्तरंजित
  11. अनुचित
  12. मनोहर
शब्दविग्रहभेद
चिड़ीमारचिड़ी को मारने वालाकर्म तत्पुरुष
राजगृहराजा का गृहसंबंध तत्पुरुष
यज्ञशालायज्ञ के लिए शालासंप्रदान तत्पुरुष
धर्मविमुखधर्म से विमुखअपादान तत्पुरुष
आत्मविश्वासआत्मा पर विश्वासअधिकरण तत्पुरुष
शोकाकुलशोक से आकुलकरण तत्पुरुष
पदच्युतपद से च्युतअपादान तत्पुरुष
कविश्रेष्ठकवियों में श्रेष्ठअधिकरण तत्पुरुष
गुरुदक्षिणागुरु के लिए दक्षिणासंप्रदान तत्पुरुष
रक्तरंजितरक्त से रंजितकरण तत्पुरुष
अनुचितन उचितनञ् तत्पुरुष
मनोहरमन को हरने वालाकर्म तत्पुरुष

यह भी पढ़ें: संज्ञा किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद और उदाहरण

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

तत्पुरुष समास क्या है?

तत्पुरुष समास वह समास है जिसमें उत्तरपद (दूसरा शब्द) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच का कारक चिह्न — को, से, के लिए, का, में, पर — लुप्त हो जाता है। जैसे राजपुत्र = राजा का पुत्र, जलमग्न = जल में मग्न।

तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं?

तत्पुरुष समास के मुख्य रूप से 6 भेद होते हैं — कर्म (द्वितीया), करण (तृतीया), संप्रदान (चतुर्थी), अपादान (पंचमी), संबंध (षष्ठी) और अधिकरण (सप्तमी) तत्पुरुष। इनके अलावा नञ् तत्पुरुष भी एक महत्वपूर्ण भेद है। कर्ता कारक का लोप नहीं होता, इसलिए कर्तृ तत्पुरुष नाम का कोई भेद नहीं होता।

तत्पुरुष समास में कौन सा पद प्रधान होता है?

तत्पुरुष समास में उत्तरपद यानी दूसरा पद प्रधान होता है और पूर्वपद गौण। जैसे राजपुत्र में मुख्य बात पुत्र है, राजा नहीं।

करण और अपादान तत्पुरुष में क्या अंतर है?

दोनों का चिह्न से है, पर अर्थ अलग है। करण तत्पुरुष में से का मतलब साधन होता है, जैसे हस्तलिखित = हाथ से लिखा हुआ। अपादान तत्पुरुष में से का मतलब अलग होना होता है, जैसे पथभ्रष्ट = पथ से भ्रष्ट।

तत्पुरुष और कर्मधारय समास में क्या अंतर है?

तत्पुरुष में दोनों पदों के बीच कारक का संबंध होता है और विग्रह में का, को, से, में जैसा चिह्न लगता है। कर्मधारय में विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है और विग्रह में जो … है लगता है। जैसे राजपुत्र तत्पुरुष है, पर नीलकमल कर्मधारय।

नञ् तत्पुरुष समास किसे कहते हैं?

जिस तत्पुरुष समास में पूर्वपद निषेध बताने वाला उपसर्ग हो — अ, अन्, न, ना — उसे नञ् तत्पुरुष कहते हैं। जैसे अनपढ़ = न पढ़ा हुआ, असंभव = न संभव, अन्याय = न न्याय।

निष्कर्ष

तत्पुरुष समास का पूरा खेल एक ही बात पर टिका है — बीच में कौन-सा कारक चिह्न लुप्त हुआ है। वही चिह्न भेद का नाम भी बता देता है। “को” मिला तो कर्म, “से” (साधन) मिला तो करण, “से” (अलगाव) मिला तो अपादान, “के लिए” मिला तो संप्रदान, “का/के/की” मिला तो संबंध, और “में/पर” मिला तो अधिकरण।

ऊपर दिए 10 उदाहरणों की टेबल को एक बार याद कर लीजिए — उसमें छहों भेद आ जाते हैं। इसके बाद कोई भी नया शब्द सामने आए, 3-स्टेप ट्रिक लगाकर आप खुद उसका भेद निकाल सकते हैं।