क्या आप जानते हैं कि इस्लाम धर्म कितना पुराना है? इस लेख में हम इस्लाम धर्म की शुरुआत और इसके इतिहास के बारे में जानेंगे। यह धर्म विश्व का एक प्रमुख धर्म है और भारत में हिन्दू धर्म के बाद दूसरा सबसे प्रचलित धर्म है।
इस्लाम धर्म कितना पुराना है?
इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 7वीं शताब्दी में मक्का से हुई, जब 610 ईस्वी में पैगम्बर मुहम्मद को पहला संदेश मिला। 622 ईस्वी में हुई हिजरत से इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत मानी जाती है। हालांकि कुरान के अनुसार इस्लाम की शुरुआत हज़रत आदम से मानी जाती है — यानी मानव जाति जितनी पुरानी।
| घटना | वर्ष | आज से कितने साल पहले |
|---|---|---|
| पैगम्बर मुहम्मद का जन्म | 570 ईस्वी | लगभग 1456 साल |
| पहला संदेश (हिरा गुफा) | 610 ईस्वी | लगभग 1416 साल |
| प्रचार की शुरुआत | 613 ईस्वी | लगभग 1413 साल |
| हिजरत (मक्का से मदीना) | 622 ईस्वी | लगभग 1404 साल |
| पैगम्बर मुहम्मद का निधन | 632 ईस्वी | लगभग 1394 साल |
इस्लाम का उदय हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से माना जाता है, परंतु इसका संगठित रूप हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के समय से ही आरंभ होता है। हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ। लगभग 613 ईस्वी में, उन्होंने अपने ज्ञान और उपदेशों का प्रचार आरंभ किया, जो इस्लाम धर्म का आधार बना। यह समय इस्लाम के प्रारंभ के रूप में महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके द्वारा दिए गए शिक्षाओं और उपदेशों ने इस्लाम को एक प्रमुख धर्म के रूप में स्थापित किया।
इस्लाम का वैश्विक प्रसार (Global spread of Islam)
Islam धर्म का अनुसरण विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 24 प्रतिशत लोग करते हैं। यह धर्म पूरे विश्व में फैल चुका है और इसके अनुयायी सभी महाद्वीपों पर पाए जाते हैं। इस्लाम धर्म की इस वैश्विक उपस्थिति के पीछे कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कारण हैं।
इस्लाम धर्म के प्रमुख क्षेत्र
- मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA)
- इस्लाम का जन्मस्थल मक्का और मदीना, सऊदी अरब में स्थित हैं।
- इस क्षेत्र में इस्लाम धर्म का सबसे अधिक प्रभाव है, और यहाँ की अधिकांश जनसंख्या मुस्लिम है।
- प्रमुख देशों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, मिस्र, और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
- दक्षिण एशिया
- भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण स्थान है।
- भारत में, लगभग 14 प्रतिशत भारतीय मुस्लिम धर्म का पालन करते हैं, जो इसे यहाँ का दूसरा सबसे बड़ा धर्म बनाता है।
- पाकिस्तान और बांग्लादेश में इस्लाम धर्म प्रमुख धर्म है।
- दक्षिण पूर्व एशिया
- इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम आबादी वाला देश है।
- अन्य प्रमुख मुस्लिम देशों में मलेशिया और ब्रुनेई शामिल हैं।
- अफ्रीका
- सहारा के दक्षिण में कई देशों में इस्लाम धर्म का प्रमुखता है, जैसे कि नाइजीरिया, सूडान, और सोमालिया।
- पश्चिम अफ्रीका के देशों में भी इस्लाम का महत्वपूर्ण प्रभाव है।
- यूरोप
- यूरोप में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है, खासकर प्रवास और शरणार्थी संकट के कारण।
- फ्रांस, जर्मनी, और यूनाइटेड किंगडम में मुस्लिम समुदाय बड़े हैं।
- उत्तर अमेरिका
- संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में भी मुस्लिम समुदाय का विस्तार हो रहा है।
- इन देशों में विभिन्न मुस्लिम समुदायों के मस्जिद, सांस्कृतिक केंद्र, और संगठनों की स्थापना हो चुकी है।
वैश्विक प्रसार के कारण
- वाणिज्यिक मार्ग: ऐतिहासिक रूप से, व्यापारी मार्गों ने इस्लाम को विभिन्न क्षेत्रों में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- धार्मिक मिशन: सूफी संतों और धार्मिक विद्वानों ने इस्लाम का प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- राजनीतिक प्रभाव: इस्लामी साम्राज्यों, जैसे कि उमय्यद, अब्बासिद, और उस्मानिया साम्राज्य, ने इस्लाम को अपने शासन के क्षेत्रों में फैलाया।
- प्रवासन: आधुनिक युग में, मुस्लिम देशों से प्रवासन और शरणार्थी संकट ने भी इस्लाम की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाया है।
इस प्रकार, इस्लाम धर्म की वैश्विक उपस्थिति विभिन्न कारणों और प्रक्रियाओं का परिणाम है, जिसने इसे एक प्रमुख वैश्विक धर्म बना दिया है।
इस्लाम से संबंधित मुख्य प्रश्न (Main questions related to Islam)
इस्लाम कब शुरू हुआ? islam ka itihas in hindi
इस्लाम धर्म की उत्पत्ति 7वीं शताब्दी के शुरुआत में मक्का और मदीना में हुई थी। इस्लाम धर्म की स्थापना पैगम्बर मुहम्मद द्वारा की गई थी, जिन्हें 610 ईस्वी में पहली बार देवदूत जिब्रील (गैब्रियल) के माध्यम से अल्लाह का संदेश प्राप्त हुआ। मुहम्मद ने अल्लाह के इन संदेशों को लोगों तक पहुँचाना शुरू किया, जो बाद में कुरान के रूप में संकलित हुए। मक्का और मदीना में उनके द्वारा किया गया इस्लाम का प्रचार तेजी से फैलता गया, और उनके अनुयायियों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती गई। 632 ईस्वी में पैगम्बर मुहम्मद के निधन के बाद भी इस्लाम धर्म का प्रसार जारी रहा, और यह आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है।
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इस्लाम की स्थापना कैसे हुई? (Muslim Religion History in Hindi)
इस्लाम की स्थापना पैगम्बर मुहम्मद द्वारा की गई थी। 610 ईस्वी में, मक्का के हिरा पर्वत की एक गुफा में, मुहम्मद को स्वर्गदूत गेब्रियल (जिब्रील) ने अल्लाह का पहला संदेश दिया। यह पहला संदेश “इकरा” (पढ़ो) था, जो कि कुरान की आयत का एक हिस्सा है। इस घटना के बाद, मुहम्मद ने अल्लाह के संदेशों को अपने अनुयायियों तक पहुंचाना शुरू किया।
मुहम्मद ने लोगों को एक ईश्वर, अल्लाह, की इबादत करने का संदेश दिया और उन्हें नैतिकता, न्याय और सहिष्णुता के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। मक्का में प्रारंभिक वर्षों में उन्हें विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके दृढ़ संकल्प और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ाया।
622 ईस्वी में, मुहम्मद और उनके अनुयायियों ने मक्का से मदीना की यात्रा की, जिसे हिजरत कहा जाता है। इसी हिजरत से इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) की शुरुआत मानी जाती है। मदीना में इस्लाम को एक नया आधार मिला और वहां उनकी धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व की स्वीकृति हुई। मदीना में इस्लामी समाज की स्थापना हुई, जहाँ मुहम्मद ने शरीयत (इस्लामी कानून) को लागू किया और न्याय, भाईचारे और समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक समुदाय का निर्माण किया।
पैगम्बर मुहम्मद की शिक्षाएं और उनके जीवन का उदाहरण आज भी इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक हैं, और उनके द्वारा स्थापित इस्लामी सिद्धांत कुरान और हदीस में संरक्षित हैं।
कुरान: इस्लाम का पवित्र ग्रंथ (The Quran: The Holy Scripture of Islam)
कुरान इस्लाम की पवित्र पुस्तक है और इस्लामी परंपरा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कुरान को मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को अल्लाह द्वारा प्राप्त प्रत्यक्ष वाणी माना जाता है। इस्लाम के अनुयायी कुरान को अल्लाह का अंतिम संदेश और मार्गदर्शन मानते हैं जो मानव जाति के लिए अमर है।
Quran में अल्लाह के अस्तित्व, एकता और सर्वशक्तिमान होने का प्रमाण दिया गया है। इसमें नैतिक और धार्मिक शिक्षाएं, कानून और नियम भी दिए गए हैं जिन्हें शरीयत कहा जाता है। कुरान में कई कहानियां और दृष्टांत भी दिए गए हैं जो मुसलमानों के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं।
इस्लाम में कुरान को मुहम्मद का अंतिम संदेश माना जाता है। इसके बाद कोई नया संदेश या वाणी नहीं आई। इसलिए मुसलमानों के लिए कुरान को अल्लाह का अंतिम और अपरिवर्तनीय संदेश मानना अनिवार्य है। कुरान को इस्लाम का मूल स्रोत और आधार माना जाता है जो मुसलमानों के जीवन को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
पैगम्बर मुहम्मद को प्रकाशना
कुरान को मुस्लिमों का पवित्र ग्रंथ माना जाता है। इसमें अल्लाह के शब्द हैं, जिन्हें पैगम्बर मुहम्मद को एंजेल गेब्रियल द्वारा बताया गया था।
कुरान में शामिल मूल सिद्धांत
यह पवित्र ग्रन्थ इस्लाम धर्म के कई मूल सिद्धांत शामिल हैं जो मुसलमानों के लिए जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
विश्वास (ईमान)
कुरान में ईमान (विश्वास) का विशेष महत्व है। मुसलमानों का विश्वास होता है कि अल्लाह एक है, और मुहम्मद उनके अंतिम पैगम्बर हैं। इसके साथ ही, स्वर्गदूतों, पवित्र पुस्तकों, पैगम्बरों, क़ियामत के दिन (प्रलय), और अल्लाह की पूर्वनिर्धारित योजना पर विश्वास करना भी शामिल है।
नैतिकता (अख़लाक़)
कुरान नैतिकता पर बहुत जोर देता है। मुसलमानों को अच्छे व्यवहार, सत्यवादिता, दया, न्याय, और परोपकारिता के गुणों को अपनाने की सलाह दी जाती है। बुराई से बचने, ईर्ष्या, घृणा, झूठ, और अन्य अनैतिक कार्यों से दूर रहने की भी सलाह दी जाती है।
कानून (शरीयत)
कुरान में इस्लामिक कानून के कई पहलू शामिल हैं, जिन्हें शरीयत कहा जाता है। शरीयत मुसलमानों को उनके धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, और व्यक्तिगत जीवन में मार्गदर्शन प्रदान करती है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, व्यापार, और आपराधिक न्याय से संबंधित नियम शामिल हैं।
इबादत (पूजा)
कुरान में इबादत का विशेष महत्व है। मुसलमानों को दिन में पांच बार नमाज (प्रार्थना) पढ़ने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, रोज़ा (उपवास), ज़कात (दान), और हज (मक्का की तीर्थयात्रा) भी इस्लामी इबादत के महत्वपूर्ण अंग हैं।
सामाजिक न्याय
कुरान में सामाजिक न्याय पर जोर दिया गया है। यह न्याय, समानता, और भाईचारे के सिद्धांतों को बढ़ावा देता है। अमीरों को गरीबों की मदद करने, अन्याय से लड़ने, और सभी लोगों के साथ समान व्यवहार करने की शिक्षा दी जाती है।
पवित्रता और शुद्धता
कुरान में पवित्रता और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धता, दोनों पर जोर दिया गया है। मुसलमानों को अपने शरीर, कपड़े, और स्थान को साफ रखने की शिक्षा दी जाती है। आध्यात्मिक शुद्धता के लिए बुरी आदतों और गलत विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
न्याय और दया
कुरान में न्याय और दया के सिद्धांत भी महत्वपूर्ण हैं। मुसलमानों को अन्य लोगों के साथ न्याय और दया के साथ व्यवहार करने की सलाह दी जाती है। उन्हें कमजोर और जरूरतमंद लोगों की मदद करने, और उनके अधिकारों की रक्षा करने का आदेश दिया गया है।
ये सिद्धांत कुरान की मुख्य शिक्षा हैं और ये मुसलमानों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कुरान का हर शब्द और हर आयत मुसलमानों के लिए मार्गदर्शक होती है, और ये सिद्धांत उन्हें एक सफल और सुखमय जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
Islam Dharm Ka Itihas Kitna Purana Hai — इस्लाम का ऐतिहासिक दृष्टिकोण
मक्का और मदीना में प्रारंभ
इस्लाम धर्म की शुरुआत 7वीं शताब्दी के शुरुआत में मक्का और मदीना में हुई थी। माना जाता है कि आदम, जो पहले इंसान थे, मुस्लिम धर्म के पहले धारक थे।
पैगम्बर मुहम्मद की भूमिका
पैगम्बर मुहम्मद को अंतिम पैगम्बर माना जाता है। उन्होंने 613 ईस्वी से इस्लाम धर्म का प्रचार करना शुरू किया।
आदम और प्रारंभिक पैगम्बरों के बारे में विश्वास
कुछ लोग मानते हैं कि इस्लाम की शुरुआत आदम से हुई थी और दुनिया के शुरुआत से ही इस्लाम धर्म मौजूद है। इसी वजह से “इस्लाम कितना पुराना है” का जवाब दो तरह से दिया जाता है — ऐतिहासिक रूप से लगभग 1400 साल, और धार्मिक मान्यता के अनुसार मानव जाति जितना पुराना।
इस्लाम के प्रमुख समुदाय कौन-कौन से हैं? (What are the major sects of Islam)
सुन्नी
सुन्नी इस्लाम, मुसलमानों का सबसे बड़ा समूह है, जो लगभग 80 से 90 प्रतिशत मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। सुन्नी समुदाय का मानना है कि मुसलमानों के नेता (खलीफा) का चुनाव समुदाय द्वारा किया जाना चाहिए।
शिया
शिया इस्लाम, मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा समूह है, जो लगभग 10 से 20 प्रतिशत मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करता है। शिया मुसलमानों का मानना है कि नेतृत्व का अधिकार केवल मुहम्मद के वंशजों, विशेषकर अली और उनके वंशजों को ही होना चाहिए।
खारिजी
खारिजी इस्लाम का एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक समुदाय है, जो शिया और सुन्नी दोनों से अलग है। यह समुदाय इस्लाम के पहले काल में उत्पन्न हुआ था और इसके अनुयायी अपने समय के खलीफाओं के खिलाफ विद्रोह के लिए जाने जाते हैं।
इन समुदायों के अलावा, इस्लाम में कई अन्य छोटे पंथ और संप्रदाय भी हैं, जैसे सूफी, अहमदिया आदि, जो विभिन्न धार्मिक और आध्यात्मिक विश्वासों का पालन करते हैं।
इस्लाम के पांच स्तंभ (Five Pillars of Islam In Hindi)
इस्लाम धर्म के पांच स्तंभ हैं जिनका पालन करना आवश्यक है:
शाहादा (विश्वास)
इसका अर्थ है कि अल्लाह के इलावा और कोई पूजनीय नहीं है।
सलात (नमाज)
नमाज पढ़ना इस्लाम धर्म में सबसे जरूरी माना जाता है। दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम है।
| समय | नमाज का नाम |
|---|---|
| सुबह | फजर |
| दोपहर | जोहर |
| शाम | असर |
| सूर्यास्त | मगरिब |
| रात | ईशा |
सॉम (रमजान के दौरान उपवास)
रमजान के महीने में रोज़ा रखना इस्लाम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
जकात (दान)
इस्लाम धर्म में अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों को दान करना आवश्यक है।
हज (मक्का की तीर्थयात्रा)
हर मुस्लिम को अपने जीवनकाल में एक बार मक्का शरीफ हज करने जाना चाहिए।
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इस्लाम में 786 का महत्व
786 का अर्थ
786 का उपयोग आमतौर पर अरबी शब्द “بسم الله الرحمن الرحيم” (बिस्मिल्लाह अर-रहमान अर-रहीम) के प्रतिनिधि के रूप में किया जाता है। इसका अर्थ होता है “अल्लाह के नाम से, जो दयालु और कृपालु है।” यह आयत कुरान की शुरुआती आयतों में से एक है और इस्लामिक प्रार्थनाओं और दैनिक गतिविधियों की शुरुआत में इसका उच्चारण किया जाता है।
सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
- पवित्रता और आशीर्वाद: मुसलमानों के लिए यह नंबर धार्मिक आशीर्वाद और पवित्रता का प्रतीक है। इसे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले लिखा जाता है, जैसे कि व्यापार के दस्तावेज, महत्वपूर्ण पत्र, या धार्मिक सामग्री पर।
- लिखावट और कला: इस नंबर का इस्तेमाल कला और डिजाइन में भी होता है। मस्जिदों, धार्मिक किताबों, और सजावटी वस्तुओं पर 786 अंक लिखा जाता है, जिससे कि उन वस्तुओं को अल्लाह के नाम के साथ जोड़ा जा सके।
- आध्यात्मिक कनेक्शन: 786 का उच्चारण करते समय, मुसलमान अपने दिल और मन को अल्लाह की ओर केंद्रित करते हैं। यह संख्या उन्हें धार्मिक विचार और कार्यों के प्रति सजग और समर्पित बनाए रखने में मदद करती है।
अंकगणितीय दृष्टिकोण
अरबी वर्णमाला में प्रत्येक अक्षर का एक अंकगणितीय मान होता है। 786 की व्याख्या इस तरह की जाती है कि ये मान मिलकर “बिस्मिल्लाह” का अर्थ व्यक्त करते हैं। यह संख्या अरबी अंकगणित के अनुसार इन अक्षरों की संख्याओं का योग है।
हिन्दू धर्म के साथ तुलना (Comparison with Hinduism In Hindi)
| हिन्दू धर्म | इस्लाम धर्म | |
|---|---|---|
| शुरुआत | वैदिक काल (लगभग 1500-500 ई.पू.) | 7वीं शताब्दी (610-622 ईस्वी) |
| अनुमानित आयु | लगभग 3500 साल या उससे अधिक | लगभग 1400 साल |
| प्रमुख ग्रंथ | वेद, उपनिषद, गीता | कुरान, हदीस |
| उत्पत्ति स्थल | प्राचीन भारत | मक्का, अरब |
हिन्दू धर्म की प्राचीनता
- इतिहास और उत्पत्ति: हिन्दू धर्म की उत्पत्ति वैदिक काल (लगभग 1500-500 ई.पू.) में हुई थी। यह धर्म वेदों, उपनिषदों और पुरानी धार्मिक परंपराओं पर आधारित है, जो प्राचीन भारत की धार्मिक और दार्शनिक विचारधारा का हिस्सा हैं।
- ग्रंथ और शास्त्र: हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में वेद, उपनिषद, महाभारत, रामायण, और भगवद गीता शामिल हैं। ये ग्रंथ प्राचीन काल से ही भारतीय समाज के धार्मिक और दार्शनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
- धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव: हिन्दू धर्म न केवल धार्मिक प्रथाओं को परिभाषित करता है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य और जीवनशैली पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
- सिद्धांत और दर्शन: हिन्दू धर्म में विभिन्न दार्शनिक और धार्मिक सिद्धांतों की विविधता है, जैसे कि कर्म, पुनर्जन्म, मोक्ष और धर्म।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर: इस्लाम धर्म लगभग 1400 साल पुराना है। इसकी शुरुआत 610 ईस्वी में मानी जाती है, जब पैगम्बर मुहम्मद को हिरा गुफा में पहला संदेश मिला। 622 ईस्वी की हिजरत से इस्लामी कैलेंडर शुरू होता है।
उत्तर: हिन्दू धर्म पुराना है। इसकी उत्पत्ति वैदिक काल (लगभग 1500-500 ई.पू.) में मानी जाती है, यानी लगभग 3500 साल या उससे भी पहले, जबकि इस्लाम लगभग 1400 साल पुराना है।
उत्तर: नहीं। ऐतिहासिक रूप से इस्लाम लगभग 1400 साल पुराना है, 2000 नहीं। हालांकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इस्लाम की शुरुआत हज़रत आदम से मानी जाती है, यानी मानव जाति जितनी पुरानी।
उत्तर: पैगम्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने। उनका जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ, 610 ईस्वी में उन्हें पहला संदेश मिला, और 613 ईस्वी से उन्होंने प्रचार शुरू किया।
उत्तर: दुनिया की लगभग 24 प्रतिशत आबादी इस्लाम धर्म को मानती है, जो इसे विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धर्म बनाता है। भारत में लगभग 14 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म का पालन करते हैं।
निष्कर्ष
इस लेख में हमने जाना कि इस्लाम धर्म कितना पुराना है — ऐतिहासिक रूप से लगभग 1400 साल, और धार्मिक मान्यता के अनुसार हज़रत आदम के समय से। इस्लाम एक व्यापक धर्म है, जो दुनियाभर में फैला हुआ है। इसके अनुयायी विविध हैं और इसके मूल सिद्धांत गहराई से जुड़े हुए हैं।
हम उम्मीद करते हैं कि इस लेख से आपको इस्लाम धर्म के विषय में जानने का अवसर मिला होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।
