छिपकली का गिरना अपने आप में शुभ या अशुभ नहीं होता — मान्यता इस बात से बदलती है कि वो शरीर के किस अंग पर गिरी। शकुन-मान्यताओं में सिर, माथा, कान, गर्दन, कंधा और पेट पर गिरना आम तौर पर शुभ माना गया है, जबकि पीठ और बालों पर गिरना अशुभ। और एक नियम, जो ज़्यादातर लेखों से छूट जाता है — पुरुष और स्त्री के लिए दायाँ-बायाँ उल्टा माना जाता है।
पहले वो नियम जो ज़्यादातर लेख नहीं बताते — स्त्री और पुरुष के लिए दिशा उल्टी है
सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में शरीर के दायें और बायें हिस्से का फल एक जैसा नहीं माना जाता, और यही जगह है जहाँ ज़्यादातर पाठक उलझते हैं। नियम सीधा है:
| किस पर गिरी | दायाँ अंग | बायाँ अंग |
|---|---|---|
| पुरुष | शुभ माना जाता है | अशुभ माना जाता है |
| स्त्री | अशुभ माना जाता है | शुभ माना जाता है |
यानी एक ही घटना — “बायें हाथ पर छिपकली गिरी” — पुरुष के लिए चेतावनी मानी जाएगी और स्त्री के लिए शुभ। नीचे दी गई सूची में जहाँ दायाँ-बायाँ लिखा है, वहाँ यह नियम लगाकर पढ़िए। सिर, माथा, पेट और नाभि जैसे बीच के अंगों पर यह दिशा वाला नियम लागू नहीं होता — वहाँ फल दोनों के लिए एक ही माना जाता है।
छिपकली किस अंग पर गिरी — पूरी अंग-वार सूची
नीचे एक नज़र में पूरी सूची है। ये सब मान्यताएँ हैं — शकुन शास्त्र और लोक-परंपरा में जो प्रचलित है, वही दर्ज है।
| अंग | क्या माना जाता है |
|---|---|
| सिर | धन, मान-सम्मान और नए अवसर का संकेत (इस पर एक उलटी मान्यता भी है — नीचे देखें) |
| माथा | पुराने मित्रों या रिश्तेदारों से मिलना, समाज में सम्मान बढ़ना |
| बाल | शुभ नहीं माना जाता — किसी अप्रिय ख़बर की आशंका |
| आँख | मानसिक शांति, किसी तनाव या बंधन से छुटकारा |
| नाक | सेहत से जुड़ा संकेत — पुरानी तकलीफ़ से आराम |
| कान | कोई अच्छी ख़बर या धन-लाभ |
| ऊपरी होंठ | ख़र्च या धन-हानि |
| निचला होंठ | धन-लाभ |
| गर्दन | शत्रु या रुकावट से छुटकारा, मान बढ़ना |
| कंधा | किसी अटके हुए काम में सफलता |
| हाथ (शुभ दिशा) | मान-सम्मान, आर्थिक स्थिति मज़बूत होना |
| हाथ (अशुभ दिशा) | ख़र्च बढ़ना — सावधानी का संकेत |
| छाती (शुभ दिशा) | घर में सुख और रिश्तों में प्रगति |
| छाती (अशुभ दिशा) | घर या रिश्ते में मतभेद |
| पेट / नाभि | सुख, समृद्धि और संतान से जुड़ा शुभ संकेत — दोनों के लिए |
| कमर (शुभ दिशा) | धन-लाभ और प्रसन्नता |
| कमर (अशुभ दिशा) | पारिवारिक या सेहत से जुड़ी उलझन |
| पीठ | अशुभ — रुकावट, या कोई पीठ पीछे विरोध कर रहा है |
| जांघ, घुटना, पिंडली | यात्रा, वाहन-सुख या स्थान-परिवर्तन |
| पैर (शुभ दिशा) | लाभ देने वाली यात्रा |
| पैर (अशुभ दिशा) | सेहत या घर की उलझन |
| ज़मीन पर गिरना | सतर्क रहने का संकेत माना जाता है — किसी अंग पर नहीं गिरी, इसलिए फल भी सामान्य |
एक बात जो कोई नहीं बताता — दो मान्यताएँ आपस में उलटी हैं
अगर आपने दो-तीन जगह पढ़ा होगा तो एक विरोधाभास ज़रूर मिला होगा: सिर पर छिपकली गिरना कहीं धन और मान-सम्मान का संकेत बताया जाता है, और कहीं गंभीर चेतावनी। दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं, और यह छपाई की ग़लती भी नहीं है।
वजह यह है कि ये दोनों अलग-अलग परंपराओं से आती हैं। सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ी सूचियों में ऊपर के अंगों — सिर, माथा, मस्तक — का फल शुभ गिना जाता है। वहीं क्षेत्रीय शकुन-परंपराओं में छिपकली का ऊपर से गिरना ही चेतावनी माना जाता है, चाहे कहीं भी गिरे। जो लेख दोनों सूचियाँ बिना बताए मिला देते हैं, वहीं से उलटी बातें निकलती हैं।
दूसरा बड़ा हिस्सा तो ऊपर वाला दिशा-नियम ही सुलझा देता है। जिन लेखों में “दायाँ शुभ, बायाँ अशुभ” लिखा होता है, वे असल में पुरुष वाला नियम लिख रहे होते हैं और यह बताना भूल जाते हैं — इसलिए स्त्री पाठक को वही बात उलटी दिखती है। यही एक चूक आधे विरोधाभास की जड़ है। ऐसा ही दो-मत वाला मामला कांच टूटना शुभ या अशुभ में भी मिलता है।
छिपकली गिर जाए तो क्या करें? — 6 उपाय
परंपरा में सबसे ज़्यादा ज़ोर एक ही बात पर है — तुरंत स्नान। बाक़ी उपाय उसी के आगे जुड़ते हैं।
- तुरंत स्नान कर लें। मान्यता में कहा गया है कि जिन कपड़ों में छिपकली गिरी हो, उन्हीं को पहनकर स्नान करना चाहिए। व्यावहारिक रूप से भी त्वचा को साबुन से अच्छी तरह धो लेना सही है।
- कपड़े धो दें। स्नान के बाद वे कपड़े धुल जाने चाहिए — यह मान्यता और सफ़ाई, दोनों तरफ़ से ठीक है।
- मंदिर में दीपक जलाएँ। शिव मंदिर में देसी घी का दीपक जलाने और ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की सलाह परंपरा में दी जाती है।
- सामर्थ्य अनुसार दान करें। तिल, उड़द या अनाज का दान — शकुन-परंपरा में अशुभ फल को शांत करने का सबसे आम उपाय यही बताया गया है।
- तुलसी दल लें। पूजा में तुलसी शामिल करने और प्रसाद रूप में तुलसी दल लेने की बात कई परंपराओं में कही जाती है।
- छिपकली को मारें नहीं। उसे धीरे से बाहर निकाल दें। छिपकली घर के कीड़े-मकोड़े खाती है, और मान्यता में भी उसे मारना ठीक नहीं माना जाता।
छिपकली से जुड़े बाक़ी शकुन — घर, दीवार और आवाज़
| स्थिति | क्या माना जाता है |
|---|---|
| दीवार पर ऊपर की ओर चढ़ना | शुभ — किसी अच्छी ख़बर का संकेत |
| दीवार पर नीचे की ओर उतरना | आगे किसी अड़चन का संकेत माना जाता है |
| पूजा घर में दिखना | शुभ — आर्थिक स्थिति सुधरने से जोड़ा जाता है |
| दो छिपकलियों का लड़ना | घर या मित्रों में कहा-सुनी का संकेत माना जाता है |
| खाना खाते समय आवाज़ करना | शुभ — कोई अच्छी ख़बर आने की मान्यता |
| घर में छिपकली का होना | अपने आप में अशुभ नहीं माना जाता; कई जगह इसे लक्ष्मी से जोड़ा जाता है |
छिपकली गिरती ही क्यों है? — शकुन से पहले यह देख लीजिए
यह हिस्सा किसी और लेख में शायद ही मिले, इसलिए ठंडे दिमाग़ से पढ़िए। छिपकली दीवार या छत पर अपने पंजों के नीचे मौजूद बेहद बारीक रचनाओं की पकड़ से चिपकी रहती है। यह पकड़ तब कमज़ोर पड़ती है जब —
- सतह चिकनी, गीली, धूल भरी या ताज़ा पुती हुई हो
- वह अचानक चौंक जाए — पंखा चलना, दरवाज़ा ज़ोर से बंद होना, रोशनी एकदम जल जाना
- वह किसी कीड़े के पीछे तेज़ी से भाग रही हो और पकड़ छूट जाए
- मौसम ठंडा हो, या वह त्वचा बदलने की अवस्था में हो
घर में दिखने वाली आम छिपकली ज़हरीली नहीं होती और काटती भी नहीं। हाँ, सरीसृपों की त्वचा और बीट पर सैल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया मिल सकते हैं — इसीलिए “तुरंत स्नान” वाला पुराना उपाय सफ़ाई के लिहाज़ से भी सही बैठता है। साबुन से हाथ-मुँह धो लेना, और जहाँ गिरी वहाँ पोंछ देना, पूरी बात इतनी ही है।
अगर घर में छिपकलियाँ बहुत बढ़ गई हैं तो शकुन से पहले वजह देखिए — रसोई की रोशनी के पास जमा होने वाले कीड़े, खुली नालियाँ, या खिड़की की टूटी जाली। कीड़े कम होंगे तो छिपकलियाँ अपने आप कम हो जाएँगी। यही सीधी-सी सोच घर में दीमक लगने वाली मान्यता पर भी लागू होती है।
क्या हर बार डरने की ज़रूरत है?
नहीं। इन सूचियों में एक भी बात ऐसी नहीं है जो किसी तय शास्त्रीय नियम की तरह हर जगह एक जैसी मिलती हो — यही वजह है कि सिर पर गिरने का फल दो जगह दो तरह लिखा मिलता है। मान्यताएँ परंपरा का हिस्सा हैं, भविष्यवाणी नहीं।
करने लायक काम बस इतना है: नहा लीजिए, कपड़े धो दीजिए, छिपकली को बाहर कर दीजिए, और आगे बढ़ जाइए। मन शांत रखना चाहें तो दीपक जला लीजिए — इससे ज़्यादा किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): छिपकली का गिरना शुभ या अशुभ
यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस अंग पर गिरी। मान्यता में सिर, माथा, कान, गर्दन, कंधा और पेट पर गिरना शुभ माना जाता है, जबकि पीठ और बालों पर गिरना अशुभ। दायें-बायें अंगों का फल पुरुष और स्त्री के लिए उल्टा माना जाता है।
सामुद्रिक शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में पुरुष के दायें अंग और स्त्री के बायें अंग पर छिपकली गिरना शुभ माना गया है, और इसका उल्टा अशुभ। सिर, माथा, पेट और नाभि जैसे बीच के अंगों पर यह दिशा-नियम लागू नहीं होता।
परंपरा में तुरंत स्नान करने को कहा गया है — जिन कपड़ों में छिपकली गिरी हो, उन्हीं में। उसके बाद कपड़े धो दें। सफ़ाई के लिहाज़ से भी त्वचा को साबुन से धो लेना सही है, क्योंकि सरीसृपों की त्वचा पर बैक्टीरिया हो सकते हैं।
क्योंकि दो अलग परंपराएँ चलती हैं। सामुद्रिक शास्त्र वाली सूचियों में सिर और माथे का फल शुभ गिना जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रीय शकुन-परंपराओं में छिपकली का ऊपर से गिरना ही चेतावनी माना जाता है। कोई एक तय शास्त्रीय नियम नहीं है।
नहीं, घर में छिपकली का होना अपने आप में अशुभ नहीं माना जाता — कई जगह उसे लक्ष्मी से जोड़ा जाता है। दीवार पर ऊपर चढ़ना शुभ और नीचे उतरना अड़चन का संकेत माना जाता है। उसे मारना किसी भी मान्यता में ठीक नहीं कहा गया।
सतह चिकनी, गीली, धूल भरी या ताज़ा पुती हो, वह अचानक चौंक जाए, किसी कीड़े के पीछे भाग रही हो, मौसम ठंडा हो या वह त्वचा बदल रही हो — इन्हीं वजहों से उसकी पकड़ छूटती है। घर में छिपकलियाँ बढ़ गई हों तो असल वजह कीड़े होते हैं, इसलिए पहले वही कम कीजिए।
निष्कर्ष
छिपकली का गिरना न पूरी तरह शुभ है, न अशुभ — मान्यता अंग से बदलती है, और दायें-बायें का फल पुरुष तथा स्त्री के लिए उल्टा माना जाता है। यही एक नियम ज़्यादातर विरोधाभास सुलझा देता है।
और करने लायक काम हर हाल में एक ही है: तुरंत स्नान, कपड़े धुले, छिपकली बाहर — बाक़ी सब मन की शांति के लिए है।

4 thoughts on “छिपकली का गिरना शुभ या अशुभ? अंग-वार संकेत और 6 उपाय”
Comments are closed.